अविपत्तिकर चूर्ण: Avipattikara Churna(Introduction, Benefits and Usages)
अविपत्तिकर चूर्ण क्या है? (What is Avipattikara Churna?)
अविपत्तिकर चूर्ण आयुर्वेद की एक प्रसिद्ध और प्रभावशाली चूर्ण कल्पना है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से अम्लपित्त (Acidity), कब्ज और पाचन विकारों के उपचार में किया जाता है। यह औषधि विशेष रूप से पित्त दोष को संतुलित करने वाली मानी जाती है। आयुर्वेद के अनुसार जब पित्त दोष अत्यधिक बढ़ जाता है, तब पेट में जलन, खट्टी डकारें, सिरदर्द, उल्टी, कब्ज और अपच जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। अविपत्तिकर चूर्ण पित्त को शमन कर इन लक्षणों को शांत करने में सहायक होता है। यह औषधि सौम्य होते हुए भी अत्यंत प्रभावकारी है और नियमित सेवन से पाचन तंत्र को संतुलन में लाने में मदद करती है। आधुनिक जीवनशैली, अनियमित भोजन और तनाव के कारण उत्पन्न अम्लपित्त में अविपत्तिकर चूर्ण आज भी व्यापक रूप से प्रयोग किया जाता है।
अविपत्तिकर चूर्ण का निर्माण एवं स्वरूप (Preparation & Morphology of Avipattikara Churna)
अविपत्तिकर चूर्ण का निर्माण पारंपरिक आयुर्वेदिक विधि से किया जाता है। इसमें विभिन्न पित्तशामक, दीपनीय और रेचक औषधियों को समान अनुपात में लेकर बारीक चूर्ण बनाया जाता है। यह चूर्ण हल्के भूरे या पीले रंग का होता है। इसका स्वाद मुख्यतः मधुर, तिक्त और कषाय होता है। इसकी गंध सौम्य होती है और यह सुपाच्य माना जाता है। चूर्ण रूप होने के कारण यह शीघ्र प्रभाव करता है और पाचन तंत्र में आसानी से अवशोषित हो जाता है। अविपत्तिकर चूर्ण विशेष रूप से उन व्यक्तियों के लिए उपयुक्त माना जाता है जिन्हें बार-बार एसिडिटी और कब्ज की समस्या रहती है।
अविपत्तिकर चूर्ण के सामान्य नाम (Common names of Avipattikara Churna)
| भाषा | नाम |
|---|---|
| आयुर्वेदिक नाम | अविपत्तिकर चूर्ण |
| हिंदी (Hindi) | अविपत्तिकर चूर्ण |
| अंग्रेजी (English) | Avipattikara Powder |
| संस्कृत (Sanskrit) | अविपत्तिकर चूर्ण |
| औषधि प्रकार | चूर्ण |
| प्रणाली | आयुर्वेद |
अविपत्तिकर चूर्ण के आयुर्वेदिक गुणधर्म (Ayurvedic Properties of Avipattikara Churna)
| गुणधर्म | विवरण |
|---|---|
| दोष (Dosha) | पित्त शामक |
| रस (Taste) | मधुर, तिक्त, कषाय |
| गुण (Qualities) | लघु (Light), स्निग्ध (Mildly Unctuous) |
| वीर्य (Potency) | शीत (Cold) |
| विपाक (Post Digestion Effect) | मधुर (Sweet) |
| प्रभाव | दीपनीय, रेचक, अम्लपित्तनाशक |
अविपत्तिकर चूर्ण के औषधीय फायदे एवं उपयोग (Benefits and Usages of Avipattikara Churna)
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अम्लपित्त में: अविपत्तिकर चूर्ण अम्लपित्त की प्रमुख औषधि है। यह पेट में बनने वाले अतिरिक्त अम्ल को शांत करता है और जलन, खट्टी डकारों से राहत देता है।
सीने में जलन में: हृदय प्रदेश में जलन और भारीपन की स्थिति में यह औषधि ठंडक प्रदान करती है और पित्त को संतुलित करती है।
कब्ज में: यह हल्का रेचक होने के कारण मल को कोमल बनाता है और नियमित मल त्याग में सहायता करता है।
अपच में: अपच, भोजन के बाद भारीपन और भूख न लगने की समस्या में अविपत्तिकर चूर्ण जठराग्नि को संतुलित करता है।
गैस और एसिडिटी में: पेट में गैस, खटास और अम्लता की स्थिति में यह औषधि अत्यंत प्रभावी मानी जाती है।
सिरदर्द में: पित्त वृद्धि के कारण होने वाले सिरदर्द में अविपत्तिकर चूर्ण लाभकारी होता है।
पित्त विकारों में: पित्त से संबंधित त्वचा पर दाने, जलन और लालिमा में यह औषधि शमन करती है।
त्वचा रोगों में: पित्तजन्य त्वचा विकारों में अविपत्तिकर चूर्ण सहायक माना जाता है।
उल्टी और मिचली में: अत्यधिक पित्त के कारण होने वाली मिचली और उल्टी में यह औषधि राहत प्रदान करती है।
उपयोगी घटक (मुख्य द्रव्य) (Key Ingredients of Avipattikara Churna)
त्रिवृत, त्रिफला, शुंठी, पिप्पली, मरिच, विडंग, नागरमोथा और एलोआ (घृतकुमारी)।
सेवन मात्रा (Dosages of Avipattikara Churna)
वयस्क 3–6 ग्राम, दिन में 1–2 बार। गुनगुने पानी या दूध के साथ सेवन करें। भोजन के बाद सेवन अधिक लाभकारी माना जाता है।
संदर्भ (References)
वैज्ञानिक अध्ययन और शोध पत्र:
- Thakar AB, Panara K, Chaudhari S. “A clinical study on the effect of Avipattikara Churna in the management of Amlapitta.” AYU Journal. 2012; 33(2):216–220. — PubMed
- Patel MV, Patel KB, Gupta SN. “Effects of Avipattikara Churna and Shankha Vati in Amlapitta.” Ayu Journal. 2010; 31(4):445–448. — PubMed
- Bhalerao MS, Bhatt NM. “Clinical evaluation of Avipattikara Churna in the management of Grahani with special reference to Irritable Bowel Syndrome.” Journal of Ayurveda and Holistic Medicine. 2014; 2(4):17–24.
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आयुर्वेदिक ग्रंथ संदर्भ:
- शार्ङ्गधर संहिता — मध्यम खण्ड (चूर्ण कल्पना)
- भावप्रकाश — मध्यम खण्ड (अम्लपित्त चिकित्सा)
- चरक संहिता — चिकित्सा स्थान अध्याय 15 (ग्रहणी रोग)
- अष्टांग हृदयम — चिकित्सा स्थान
- द्रव्यगुण विज्ञान — आचार्य प्रियव्रत शर्मा
ऑनलाइन संसाधन:
- PubMed — https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/
- Indian Journal of Traditional Knowledge — http://nopr.niscair.res.in/
- Central Council for Research in Ayurvedic Sciences (CCRAS) — http://www.ccras.nic.in/
- National Medicinal Plants Board, India — http://www.nmpb.nic.in/
पुस्तक संदर्भ:
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- Nadkarni KM. “Indian Materia Medica.” Popular Prakashan, Mumbai. 1996; Vol. 1.
- Sharangdhara. “Sharangdhara Samhita.” Chaukhamba Orientalia, Varanasi. 2002.
- Bhavamishra. “Bhavaprakasha Nighantu.” Chaukhamba Sanskrit Bhawan, Varanasi. 2010.