अशोकारिष्ट: (Ashokarishta: Introduction, Benefits and Usages)
अशोकारिष्ट क्या है? (What is Ashokarishta?)
अशोकारिष्ट एक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक औषधि है जो विशेष रूप से महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए बनाई गई है। यह एक हर्बल अरिष्ट (fermented preparation) है जिसका मुख्य घटक अशोक की छाल है। अशोकारिष्ट का उल्लेख प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों जैसे भैषज्य रत्नावली, चरक संहिता और अन्य ग्रंथों में मिलता है।
अशोकारिष्ट को महिला रोगों की सबसे उत्तम औषधि माना जाता है। यह मासिक धर्म संबंधी समस्याओं, गर्भाशय विकार, हार्मोनल असंतुलन और महिला प्रजनन तंत्र की लगभग सभी समस्याओं में अत्यंत प्रभावी है। अशोकारिष्ट का नियमित सेवन महिलाओं के समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है।
ज़्यादा जानें
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अशोकारिष्ट एक तरल औषधि है जो किण्वन प्रक्रिया द्वारा तैयार की जाती है। इसमें अशोक की छाल के अलावा अनेक अन्य औषधीय द्रव्य होते हैं जो इसके प्रभाव को बढ़ाते हैं। यह औषधि पूरी तरह से प्राकृतिक है और दीर्घकालिक उपयोग के लिए सुरक्षित है। अशोकारिष्ट का स्वाद हल्का मीठा और कसैला होता है।
आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने भी अशोकारिष्ट के महिला स्वास्थ्य पर होने वाले लाभकारी प्रभावों को स्वीकार किया है। यह गर्भाशय को मजबूत बनाता है, हार्मोन को संतुलित करता है और महिलाओं की समग्र सेहत में सुधार लाता है।
अशोकारिष्ट की संरचना (Composition of Ashokarishta)
अशोकारिष्ट में निम्नलिखित प्रमुख औषधीय द्रव्य होते हैं:
- अशोक छाल (Ashoka bark) – मुख्य घटक, गर्भाशय के लिए
- धातकी पुष्प (Dhataki flowers) – किण्वन में सहायक
- मुस्तक (Mustaka/Cyprus rotundus) – पाचन सुधारक
- हरीतकी (Haritaki) – त्रिफला का भाग
- आमलकी (Amla) – विटामिन सी से भरपूर
- विभीतकी (Vibhitaki) – त्रिफला का भाग
- अदरक (Ginger) – पाचन और दर्द निवारक
- जीरा (Cumin) – पाचन बढ़ाने वाला
- दारुहरिद्रा (Daruharidra) – संक्रमण रोधी
- उत्पल (Utpala) – शीतल गुण वाला
- गुड़ या शक्कर (Jaggery/Sugar) – किण्वन के लिए
- द्राक्षा (Grapes/Raisins) – बल वर्धक
इन सभी द्रव्यों को विशेष आयुर्वेदिक विधि से मिलाकर और किण्वन प्रक्रिया के माध्यम से अशोकारिष्ट तैयार किया जाता है।
अशोकारिष्ट के सामान्य नाम (Common names of Ashokarishta)
| भाषा | नाम |
| संस्कृत (Sanskrit) | अशोकारिष्ट |
| हिंदी (Hindi) | अशोकारिष्ट |
| अंग्रेजी (English) | Ashokarishta, Ashoka Aristha |
| मराठी (Marathi) | अशोकारिष्ट |
| गुजराती (Gujarati) | અશોકારિષ્ટ |
| तमिल (Tamil) | அசோகாரிஷ்டம் |
| तेलुगु (Telugu) | అశోకారిష్టం |
| कन्नड़ (Kannada) | ಅಶೋಕಾರಿಷ್ಟ |
| मलयालम (Malayalam) | അശോകാരിഷ്ടം |
अशोकारिष्ट के आयुर्वेदिक गुणधर्म (Ayurvedic Properties of Ashokarishta)
| गुणधर्म | विवरण |
| दोष (Dosha) | कफ-पित्त शामक, वात संतुलक |
| रस (Taste) | कषाय (Astringent), मधुर (Sweet), तिक्त (Bitter) |
| गुण (Qualities) | लघु (Light), रूक्ष (Dry) |
| वीर्य (Potency) | शीत (Cold) |
| विपाक (Post Digestion Effect) | कटु (Pungent) |
| प्रभाव (Effect) | गर्भाशय संकोचक (Uterine tonic), रक्तस्तम्भक (Hemostatic), बल्य (Strengthening), दीपन (Appetizer), पाचन (Digestive), रक्तवर्धक (Blood builder) |
अशोकारिष्ट के औषधीय फायदे एवं उपयोग (Benefits and Usages of Ashokarishta)
मासिक धर्म में अशोकारिष्ट (Ashokarishta for menstruation)
अशोकारिष्ट मासिक धर्म संबंधी सभी समस्याओं के लिए सबसे उत्तम आयुर्वेदिक औषधि है। यह मासिक धर्म को नियमित करता है और मासिक धर्म चक्र को संतुलित बनाता है। अशोकारिष्ट गर्भाशय की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है और गर्भाशय की कार्यक्षमता को बढ़ाता है।
अशोकारिष्ट का नियमित सेवन करने से मासिक धर्म समय पर आता है और मासिक धर्म के दौरान होने वाली समस्याएं जैसे अत्यधिक दर्द, भारी रक्तस्राव, अनियमितता आदि कम होती हैं। यह हार्मोन को संतुलित करता है और महिला प्रजनन तंत्र को स्वस्थ रखता है। अशोकारिष्ट विशेष रूप से एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन के संतुलन में मदद करता है।
यह गर्भाशय की आंतरिक परत (endometrium) को स्वस्थ बनाता है और मासिक धर्म के रक्त प्रवाह को नियमित करता है। किशोरियों में मासिक धर्म की शुरुआती समस्याओं से लेकर वयस्क महिलाओं की मासिक धर्म संबंधी सभी परेशानियों में अशोकारिष्ट समान रूप से प्रभावी है।
रक्तप्रदर में (Ashokarishta for menorrhagia)
रक्तप्रदर यानी मासिक धर्म में अत्यधिक रक्तस्राव की समस्या में अशोकारिष्ट अत्यंत प्रभावी है। अशोकारिष्ट में शक्तिशाली रक्तस्तम्भक गुण होते हैं जो अत्यधिक रक्तस्राव को नियंत्रित करते हैं। यह गर्भाशय की रक्त वाहिकाओं को मजबूत बनाता है और अनावश्यक रक्तस्राव को रोकता है।
अशोकारिष्ट का नियमित सेवन करने से रक्तप्रदर में बहुत लाभ होता है। यह रक्त की कमी को भी पूरा करता है और शरीर को शक्ति प्रदान करता है। रक्तप्रदर के कारण होने वाली कमजोरी, थकान, चक्कर आना और अन्य लक्षणों में भी अशोकारिष्ट बहुत उपयोगी है।
यह हीमोग्लोबिन के स्तर को बढ़ाता है और रक्त की गुणवत्ता में सुधार लाता है। अशोकारिष्ट लंबे समय तक सेवन करने पर रक्तप्रदर की समस्या जड़ से ठीक हो जाती है।
श्वेत प्रदर में (Ashokarishta for leucorrhea)
श्वेत प्रदर या सफेद पानी की समस्या में अशोकारिष्ट बहुत लाभकारी है। यह योनि मार्ग के संक्रमण को दूर करता है और श्वेत प्रदर को ठीक करता है। अशोकारिष्ट महिला प्रजनन अंगों को स्वस्थ और मजबूत बनाता है।
अशोकारिष्ट का नियमित सेवन करने से श्वेत प्रदर की समस्या धीरे-धीरे ठीक हो जाती है। यह योनि के pH संतुलन को बनाए रखता है और संक्रमण से बचाता है। श्वेत प्रदर के कारण होने वाली कमजोरी और थकान में भी यह राहत देता है।
मासिक धर्म दर्द में (Ashokarishta for menstrual cramps)
मासिक धर्म के दौरान होने वाले दर्द और ऐंठन में अशोकारिष्ट बहुत प्रभावी है। यह गर्भाशय की मांसपेशियों को आराम देता है और दर्द को कम करता है। अशोकारिष्ट में प्राकृतिक दर्द निवारक गुण होते हैं।
मासिक धर्म से कुछ दिन पहले से अशोकारिष्ट का सेवन शुरू करने से दर्द और ऐंठन में काफी राहत मिलती है। यह पेट के निचले हिस्से में होने वाले दर्द, कमर दर्द और पैरों में होने वाले दर्द को भी कम करता है।
अनियमित मासिक धर्म में (Ashokarishta for irregular periods)
अनियमित मासिक धर्म की समस्या में अशोकारिष्ट बहुत लाभकारी है। यह हार्मोन को संतुलित करके मासिक धर्म चक्र को नियमित करता है। PCOS (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम) के कारण होने वाली अनियमितता में भी अशोकारिष्ट उपयोगी है।
अशोकारिष्ट का नियमित सेवन 2-3 महीने तक करने से मासिक धर्म चक्र सामान्य हो जाता है। यह ओव्यूलेशन को भी नियमित करने में मदद करता है और प्रजनन स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है।
गर्भाशय विकार में (Ashokarishta for uterine disorders)
गर्भाशय के विभिन्न विकारों जैसे गर्भाशय की सूजन, गर्भाशय की कमजोरी, गर्भाशय में संक्रमण और अन्य गर्भाशय समस्याओं में अशोकारिष्ट अत्यंत उपयोगी है। यह गर्भाशय को टोन करता है और गर्भाशय की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है।
अशोकारिष्ट गर्भाशय के स्वास्थ्य को सुधारता है और गर्भाशय संबंधी सभी समस्याओं में लाभदायक है। यह गर्भाशय की परत को स्वस्थ बनाता है और गर्भाशय की कार्यप्रणाली में सुधार लाता है।
गर्भाशय फाइब्रॉइड में (Ashokarishta for uterine fibroids)
गर्भाशय फाइब्रॉयड और गर्भाशय के अन्य सौम्य ट्यूमर के आकार को कम करने में अशोकारिष्ट सहायक हो सकता है। यह हार्मोन को संतुलित करता है जो फाइब्रॉयड की वृद्धि को नियंत्रित करने में मदद करता है।
अशोकारिष्ट फाइब्रॉयड के कारण होने वाले लक्षणों जैसे अत्यधिक रक्तस्राव, दर्द और भारीपन में भी राहत देता है। नियमित सेवन से छोटे फाइब्रॉयड के आकार में कमी आ सकती है।
PCOS में (Ashokarishta for PCOD/PCOS)
पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) में अशोकारिष्ट बहुत लाभकारी है। यह हार्मोन को संतुलित करता है और अंडाशय की कार्यप्रणाली को सुधारता है। अशोकारिष्ट इंसुलिन प्रतिरोध को कम करने में भी मदद करता है।
PCOS के लक्षणों जैसे अनियमित मासिक धर्म, वजन बढ़ना, मुंहासे और अत्यधिक बाल उगना, इन सभी में अशोकारिष्ट का नियमित सेवन लाभदायक है। यह ओव्यूलेशन को नियमित करता है और प्रजनन क्षमता को बेहतर बनाता है।
बांझपन में (Ashokarishta for infertility)
महिलाओं में बांझपन की समस्या में अशोकारिष्ट सहायक हो सकता है। यह प्रजनन अंगों को स्वस्थ और मजबूत बनाता है। अशोकारिष्ट गर्भाशय की परत को मोटा करता है जो गर्भधारण के लिए आवश्यक है।
यह हार्मोन को संतुलित करके ओव्यूलेशन में सुधार लाता है। अशोकारिष्ट अंडाशय को स्वस्थ बनाता है और अंडों की गुणवत्ता को बेहतर करता है। प्रजनन क्षमता को बढ़ाने में यह मदद करता है।
रजोनिवृत्ति में (Ashokarishta for menopause)
रजोनिवृत्ति या मेनोपॉज के दौरान होने वाली समस्याओं में अशोकारिष्ट सहायक है। यह हार्मोन के उतार-चढ़ाव को संतुलित करता है और रजोनिवृत्ति के लक्षणों जैसे गर्म लहर, रात में पसीना, मूड स्विंग, चिड़चिड़ापन को कम करता है।
अशोकारिष्ट रजोनिवृत्ति के दौरान होने वाली अनियमित रक्तस्राव को भी नियंत्रित करता है। यह इस संक्रमण काल को आसान बनाता है और जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाता है।
प्रसव के बाद (Ashokarishta for postpartum)
प्रसव के बाद गर्भाशय को सामान्य आकार में लाने और गर्भाशय को मजबूत बनाने में अशोकारिष्ट बहुत उपयोगी है। यह प्रसव के बाद होने वाले रक्तस्राव को नियंत्रित करता है और गर्भाशय की सफाई में मदद करता है।
अशोकारिष्ट प्रसव के बाद होने वाली कमजोरी को दूर करता है और शरीर को शक्ति प्रदान करता है। यह प्रसवोत्तर अवसाद में भी सहायक हो सकता है। स्तनपान कराने वाली माताओं को चिकित्सक की सलाह से ही लेना चाहिए।
रक्त की कमी में (Ashokarishta for anemia)
अशोकारिष्ट रक्त की कमी या एनीमिया को दूर करने में बहुत प्रभावी है। यह हीमोग्लोबिन के स्तर को बढ़ाता है और रक्त की गुणवत्ता में सुधार लाता है। अशोकारिष्ट में मौजूद आयरन और अन्य पोषक तत्व रक्त निर्माण में मदद करते हैं।
एनीमिया के कारण होने वाली थकान, कमजोरी, चक्कर आना और अन्य लक्षणों में भी अशोकारिष्ट राहत देता है। विशेष रूप से मासिक धर्म के कारण होने वाली रक्त की कमी में यह बहुत उपयोगी है।
कमजोरी में (Ashokarishta for weakness)
शारीरिक कमजोरी, थकान और दुर्बलता में अशोकारिष्ट बहुत प्रभावी है। यह शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है और स्टैमिना बढ़ाता है। लंबी बीमारी के बाद या प्रसव के बाद की कमजोरी में अशोकारिष्ट रामबाण की तरह काम करता है।
यह शरीर के सभी अंगों को पोषण देता है और समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है। अशोकारिष्ट रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है।
पेट दर्द में (Ashokarishta for abdominal pain)
पेट के निचले हिस्से में होने वाले दर्द में अशोकारिष्ट लाभकारी है। यह पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाता है और पेट की ऐंठन को कम करता है। मासिक धर्म से संबंधित पेट दर्द में यह विशेष रूप से प्रभावी है।
पाचन में (Ashokarishta for digestion)
अशोकारिष्ट पाचन क्रिया को सुधारता है। यह पाचक रसों के स्राव को बढ़ाता है और भोजन को अच्छे से पचाने में मदद करता है। अपच, गैस और पेट फूलने की समस्या में भी यह उपयोगी है।
त्वचा रोग में (Ashokarishta for skin diseases)
अशोकारिष्ट रक्त को शुद्ध करके त्वचा रोगों में लाभ पहुंचाता है। यह त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाता है। मुंहासे, दाग-धब्बे और अन्य त्वचा समस्याओं में यह उपयोगी है। हार्मोनल असंतुलन के कारण होने वाले त्वचा रोगों में यह विशेष रूप से प्रभावी है।
हार्मोन संतुलन में (Ashokarishta for hormonal balance)
अशोकारिष्ट महिलाओं में हार्मोन को संतुलित करने में बहुत प्रभावी है। यह एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के स्तर को नियमित करता है। हार्मोनल असंतुलन के कारण होने वाली समस्याओं जैसे वजन बढ़ना, मूड स्विंग, मुंहासे आदि में यह लाभदायक है।
बवासीर में (Ashokarishta for piles)
बवासीर में होने वाले रक्तस्राव को रोकने में अशोकारिष्ट सहायक है। अशोकारिष्ट का नियमित सेवन करने से खूनी बवासीर में लाभ होता है। यह मस्सों की सूजन को भी कम करता है।
मूत्र रोग में (Ashokarishta for urinary disorders)
मूत्र मार्ग के संक्रमण और अन्य मूत्र विकारों में अशोकारिष्ट उपयोगी है। यह मूत्र प्रणाली को स्वस्थ रखता है और पेशाब में जलन को कम करता है।
तनाव में (Ashokarishta for stress)
अशोकारिष्ट मानसिक तनाव और चिंता को कम करने में सहायक है। यह मन को शांति प्रदान करता है और नींद को बेहतर बनाता है। हार्मोनल उतार-चढ़ाव के कारण होने वाले मूड स्विंग और चिड़चिड़ापन में भी यह राहत देता है।
हड्डियों में (Ashokarishta for bones)
अशोकारिष्ट हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है। यह कैल्शियम के अवशोषण को बेहतर बनाता है। रजोनिवृत्ति के बाद होने वाली हड्डियों की कमजोरी और ऑस्टियोपोरोसिस से बचाव में यह सहायक है।
मुख्य घटक (Key Ingredients)
अशोक छाल – गर्भाशय को मजबूत बनाती है, रक्तस्राव को नियंत्रित करती है
धातकी पुष्प – किण्वन में सहायक और औषधि को प्रभावी बनाता है
मुस्तक – पाचन सुधारता है, दर्द कम करता है
त्रिफला – आंतों को साफ करता है, रसायन गुण
अदरक – दर्द निवारक, पाचन बढ़ाता है
दारुहरिद्रा – संक्रमण रोधी, रक्त शुद्धिकारक
सेवन मात्रा (Dosages of Ashokarishta)
वयस्क महिलाओं के लिए:
- मात्रा: 15-30 मिली (3-6 चम्मच)
- दिन में दो बार (सुबह और शाम)
- भोजन के बाद
किशोरियों के लिए (12-18 वर्ष):
- मात्रा: 10-15 मिली (2-3 चम्मच)
- दिन में दो बार
- भोजन के बाद
नोट: पुरुषों के लिए यह औषधि सामान्यतः अनुशंसित नहीं है क्योंकि यह मुख्य रूप से महिला स्वास्थ्य के लिए बनाई गई है।
सेवन विधि (Method of consumption)
अशोकारिष्ट को बराबर मात्रा में गुनगुने पानी के साथ मिलाकर लेना चाहिए। इसे भोजन के तुरंत बाद लेना सबसे अच्छा होता है।
उदाहरण: यदि आप 15 मिली अशोकारिष्ट ले रही हैं तो इसे 15 मिली गुनगुने पानी के साथ मिलाकर पिएं।
विशेष सुझाव:
- मासिक धर्म से 5-7 दिन पहले से शुरू करें
- मासिक धर्म के दौरान भी जारी रखें
- कम से कम 2-3 महीने तक नियमित सेवन करें
- बेहतर परिणाम के लिए 6 महीने तक सेवन करें
सावधानियां (Precautions of Ashokarishta)
अशोकारिष्ट का सेवन करते समय निम्नलिखित सावधानियां रखनी चाहिए:
- गर्भवती महिलाओं को अशोकारिष्ट का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए क्योंकि यह गर्भाशय संकुचन कर सकता है।
- स्तनपान कराने वाली माताओं को चिकित्सक की सलाह से ही लेना चाहिए।
- मधुमेह के रोगियों को इसमें शक्कर होने के कारण सावधानी से लेना चाहिए।
- इसमें अल्कोहल (5-10%) होता है, इसलिए वाहन चलाने से पहले सावधानी बरतें।
- किशोरियों को उचित मात्रा में दें।
- बताई गई मात्रा से अधिक सेवन न करें।
- ठंडी और सूखी जगह पर रखें, सीधी धूप से बचाएं।
- बोतल खोलने के बाद 6 महीने के अंदर उपयोग करें।
- यदि किसी घटक से एलर्जी हो तो सेवन न करें।
- यदि भारी रक्तस्राव हो रहा हो तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।
- हार्मोनल दवाइयां ले रही हैं तो चिकित्सक को बताएं।
- शल्य क्रिया से पहले चिकित्सक को अवश्य बताएं।
- यदि सेवन के बाद कोई दुष्प्रभाव हो तो तुरंत बंद करें।
महत्वपूर्ण सूचना:
यह जानकारी केवल शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। अशोकारिष्ट महिलाओं के लिए एक शक्तिशाली औषधि है। इसका सेवन योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की देखरेख में ही करें। विशेष रूप से गर्भावस्था में इसका सेवन बिल्कुल न करें।
किसी भी गंभीर स्त्री रोग में या दीर्घकालिक उपयोग के लिए हमेशा पंजीकृत आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें। यदि अत्यधिक रक्तस्राव हो या गंभीर दर्द हो तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।
घरेलू उपयोग के सुझाव:
मासिक धर्म नियमित करने के लिए: अशोकारिष्ट 15-30 मिली + बराबर पानी, भोजन के बाद दिन में दो बार, कम से कम 3 महीने तक।
रक्तप्रदर में: अशोकारिष्ट 20-30 मिली + बराबर पानी + आयरन युक्त आहार, दिन में दो बार।
मासिक धर्म दर्द के लिए: मासिक धर्म से 5 दिन पहले से शुरू करें, अदरक की चाय के साथ लें।
PCOS में: अशोकारिष्ट + संतुलित आहार + व्यायाम + तनाव प्रबंधन, 6 महीने तक नियमित।
आहार संबंधी सुझाव:
अशोकारिष्ट का सेवन करते समय:
- हरी सब्जियां और फल खाएं
- आयरन युक्त आहार जैसे पालक, चुकंदर, अनार लें
- पर्याप्त पानी पिएं (8-10 गिलास)
- तला-भुना और जंक फूड से बचें
- नियमित व्यायाम या योग करें
- तनाव से बचें, पर्याप्त नींद लें
- धूम्रपान और शराब से बचें
कब परिणाम दिखाई देंगे:
- मासिक धर्म दर्द में: 1-2 चक्र में राहत
- अनियमित मासिक धर्म में: 2-3 महीने में सुधार
- रक्तप्रदर में: 2-4 सप्ताह में कमी
- कमजोरी में: 2-3 सप्ताह में बेहतर महसूस
- PCOS में: 3-6 महीने में स्पष्ट सुधार
संदर्भ ग्रंथ:
- भैषज्य रत्नावली
- चरक संहिता
- योगरत्नाकर
- आयुर्वेद सार संग्रह
- स्त्री रोग चिकित्सा
External References
Ayurvedic Arishta/Asava Preparations Overview
https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC4296439/
Pharmacological Properties of Saraca asoca (Ashoka)
https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC3330175/
Herbal Medicine for Women’s Reproductive Health
https://www.sciencedirect.com/science/article/pii/S2221169116300366
Traditional Ayurvedic Arishta Uses (Ayurveda therapeutic review)
https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC5685208/
Clinical Herbal Interventions in Menstrual Disorders
https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/31084843/
Herbs and PCOS: Evidence & Mechanisms
https://www.frontiersin.org/articles/10.3389/fphar.2017.00551/full
Herbal Hemostatic Agents and Ashoka Bark
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https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/33726523/