Agaru
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अगरु (Agaru: Introduction, Benefits and Usages)

अगरु का परिचय (Introduction of Agaru)

Table of Contents

Table of Contents

  • अगरु का परिचय (Introduction of Agaru)
  • अगरु क्या है? (What is Agaru?)
  • अगरु का बाह्यस्वरूप (Morphology of Agaru)
  • अगरु के सामान्य नाम (Common names of Agaru)
  • अगरु के आयुर्वेदिक गुणधर्म (Ayurvedic Properties of Agaru)
  • अगरु के औषधीय फायदे एवं उपयोग (Benefits and Usages of Agaru)
  • श्वास रोग में (For respiratory disorders)
  • कफ रोग में (For kapha disorders)
  • वात रोग में (For vata disorders)
  • त्वचा रोग में (For skin diseases)
  • घाव में (For wounds)
  • सूजन में (For inflammation)
  • जोड़ों के दर्द में (For joint pain)
  • बुखार में (For fever)
  • पाचन विकार में (For digestive disorders)
  • हृदय रोग में (For heart disorders)
  • मूत्र रोग में (For urinary disorders)
  • मानसिक रोग में (For mental disorders)
  • स्त्री रोग में (For gynecological disorders)
  • यकृत रोग में (For liver disorders)
  • दांत और मुँह में (For teeth and mouth)
  • विष में (For poison)
  • सिरदर्द में (For headache)
  • कृमि रोग में (For worms)
  • उपयोगी अंग (भाग) (Important parts of Agaru)
  • सेवन मात्रा (Dosages of Agaru)
  • सावधानियां (Precautions of Agaru)
  • संदर्भ (References)

अगरु क्या है? (What is Agaru?)

एक ऐसा अद्भुत और बहुमूल्य औषधीय वृक्ष है अगरु। जिसके बारे में जानकर आप हैरान रह जायेंगे। अगरु का प्रयोग आयुर्वेद में सदियों से किया जाता है। अगरु का पेड़ भारत के पूर्वोत्तर राज्यों — विशेष रूप से असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और त्रिपुरा — में पाया जाता है। इसके अलावा यह म्यांमार, भूटान, बांग्लादेश और दक्षिण-पूर्व एशिया में भी पाया जाता है।

अगरु विश्व की सबसे मूल्यवान और दुर्लभ वनस्पतियों में से एक है। अगरु की लकड़ी और इसका तेल अत्यंत महँगा होता है। अगरु की सुगंध अनूठी और दिव्य होती है। अगरु का उपयोग मुख्य रूप से श्वास रोग, वात-कफ विकार, त्वचा रोग और मानसिक शांति के लिए किया जाता है। आयुर्वेद में इसे ‘वरेण्य’ (सर्वश्रेष्ठ) द्रव्यों में गिना जाता है।

ज़्यादा जानें:

अगरु को आप किसी भी तरह से उपयोग करें तो आपको हर तरफ से लाभ मिलता है। अगरु भारत का एक अत्यंत पवित्र, दुर्लभ और बहुमूल्य वृक्ष है। इसकी लकड़ी में एक विशेष प्रकार का सुगंधित राल (Resin) होता है जो वास्तव में एक कवक संक्रमण (Fungal Infection) के प्रतिक्रियास्वरूप बनता है। यही राल अगरु को उसका औषधीय और सुगंधिक महत्व देती है।

अगरु को संस्कृत में ‘कृमिजग्ध’ भी कहते हैं अर्थात वह जो कृमि (कीट/कवक) द्वारा सेवन किया गया हो — यही इसकी विशेषता है। यह एक प्राकृतिक औषधि है जो विशेष रूप से श्वसन रोगों, वात-कफ विकारों और मन की अशांति के लिए बहुत गुणकारी होती है।

अगरु का बाह्यस्वरूप (Morphology of Agaru)

अगरु का पेड़ 20–40 मीटर ऊँचा, सदाबहार, बड़े आकार का वृक्ष होता है। इसके तने मोटे, छाल सफेद-भूरे रंग की, चिकनी होती है। अगरु के पत्ते सरल, एकान्तर, 6–12 सेमी लंबे, भालाकार (lanceolate) से अंडाकार होते हैं। पत्ते चमकदार, गहरे हरे रंग के होते हैं। अगरु के फूल छोटे, पीलापन लिए हुए सफेद रंग के होते हैं और गुच्छों में लगते हैं। अगरु के फल अंडाकार कैप्सूल होते हैं जो पकने पर फटकर 2 बीज बाहर निकालते हैं। बीज लाल रंग के, लंबे, एक तरफ से धागेनुमा संरचना से लटके होते हैं।

अगरु की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसकी राल युक्त गहरे रंग की भारी लकड़ी है। जब अगरु का पेड़ Phialophora parasitica नामक कवक से संक्रमित हो जाता है, तो पेड़ अपनी रक्षा में एक गहरे भूरे-काले रंग की सुगंधित राल उत्पन्न करता है। यही राल युक्त लकड़ी ‘अगरु’ या ‘Agarwood’ के नाम से जानी जाती है और यह पानी में डूब जाती है — इसीलिए इसे ‘जलाशयी’ भी कहते हैं।

अगरु के सामान्य नाम (Common names of Agaru)

भाषानाम
वानस्पतिक नाम (Botanical Name)Aquilaria agallocha (Aquilaria malaccensis)
अंग्रेजी (English)Agarwood, Aloeswood, Eaglewood, Oud
हिंदी (Hindi)अगर, अगरु
संस्कृत (Sanskrit)अगरु, कृमिजग्ध, लोहित, राजर्ह, वंशिक, योगज
अन्य (Other)আগর (बंगाली), अगरु (मराठी), અગરુ (गुजराती), அகில் (तमिल — Akil), అగరు (तेलुगु), ಅಗರು (कन्नड़), Agar (उर्दू/फारसी), Oud (अरबी)
कुल (Family)Thymelaeaceae
IUCN Statusसंकटग्रस्त (Vulnerable) — CITES Appendix II

अगरु के आयुर्वेदिक गुणधर्म (Ayurvedic Properties of Agaru)

गुणधर्मविवरण
दोष (Dosha)वात-कफ शामक, पित्त को सामान्यतः नहीं बढ़ाता
रस (Taste)तिक्त (Bitter), कटु (Pungent), मधुर (Sweet)
गुण (Qualities)गुरु (Heavy), स्निग्ध (Unctuous), तीक्ष्ण (Sharp)
वीर्य (Potency)उष्ण (Hot)
विपाक (Post Digestion Effect)कटु (Pungent)
प्रभाव (Special Action)दिव्य सुगंध, मेध्य (Brain Tonic), हृद्य (Cardiac Tonic)
अन्य (Others)कासघ्न, श्वासघ्न, वेदनास्थापन, त्वच्य, शोथहर, कृमिघ्न

अगरु के औषधीय फायदे एवं उपयोग (Benefits and Usages of Agaru)

श्वास रोग में अगरु (Agaru for respiratory disorders)

अगरु श्वास रोगों में अत्यंत प्रभावी है। अगरु कास (खांसी) और श्वास (Asthma) में विशेष रूप से लाभकारी है। अगरु की लकड़ी का चूर्ण या काढ़ा लेने से फेफड़ों में जमा कफ बाहर निकलता है। अगरु का धूम्रपान (Dhoomapana) श्वसन मार्ग को साफ करता है। अगरु ब्रोंकाइटिस और क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) में भी सहायक है। अगरु फेफड़ों को बल देता है और श्वसन तंत्र को स्वस्थ रखता है।

कफ रोग में (Agaru for kapha disorders)

अगरु कफ नाशक (Kaphahara) है। अगरु के उष्ण वीर्य और तीक्ष्ण गुण कफ को सुखाते हैं और बाहर निकालते हैं। अगरु कफ से उत्पन्न होने वाली खांसी, नाक बंद होना, सिर भारी होना और थकान में लाभकारी है। अगरु कफ जनित हिक्का (Hiccups) में भी प्रभावी है।

वात रोग में (Agaru for vata disorders)

अगरु वात शामक (Vatahara) औषधि है। अगरु के उष्ण और स्निग्ध गुण वात को संतुलित करते हैं। अगरु वात के कारण होने वाले दर्द, ऐंठन और अकड़न में लाभकारी है। अगरु वातज पक्षाघात (Paralysis) और अपतानक (Convulsions) में सहायक चिकित्सा के रूप में उपयोगी है।

त्वचा रोग में (Agaru for skin diseases)

अगरु त्वचा रोगों में बहुत प्रभावी है। अगरु का तेल और लेप त्वचा रोगों में बाहरी उपयोग के लिए अत्यंत लाभकारी है। अगरु दाद, खाज, खुजली और एक्जिमा में राहत देता है। अगरु त्वच्य (Skin Tonic) गुण रखता है जो त्वचा को पोषण और चमक देता है। अगरु त्वचा के संक्रमण को रोकता है और त्वचा को स्वस्थ रखता है।

घाव में (Agaru for wounds)

अगरु घाव को जल्दी भरने में मदद करता है। अगरु में एंटीसेप्टिक और एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं। अगरु की लकड़ी का चूर्ण घाव पर लगाने से घाव शीघ्र भरता है। अगरु का तेल घाव के संक्रमण को रोकता है। अगरु व्रणरोपक (Wound Healing) गुण रखता है।

सूजन में (Agaru for inflammation)

अगरु सूजन को कम करने में प्रभावी है। अगरु में शक्तिशाली शोथहर (Anti-inflammatory) गुण होते हैं। अगरु का तेल बाहरी सूजन पर मालिश करने से राहत मिलती है। अगरु आंतरिक सूजन में भी लाभकारी है। अगरु सूजन के कारण होने वाले दर्द को भी कम करता है।

जोड़ों के दर्द में (Agaru for joint pain)

अगरु जोड़ों के दर्द में अत्यंत फायदेमंद है। अगरु के तेल से जोड़ों की मालिश करने से दर्द और अकड़न में शीघ्र राहत मिलती है। अगरु संधिवात (Rheumatoid Arthritis) और वातरक्त में सहायक है। अगरु की उष्ण प्रकृति वात को शांत करके जोड़ों को बल देती है।

बुखार में (Agaru for fever)

अगरु ज्वर (बुखार) में लाभकारी है। विशेष रूप से वात-कफ जनित बुखार में अगरु प्रभावी है। अगरु का काढ़ा पीने से बुखार कम होता है। अगरु में ज्वरघ्न गुण होते हैं। अगरु शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में सहायता करता है।

पाचन विकार में (Agaru for digestive disorders)

अगरु पाचन तंत्र के लिए लाभकारी है। अगरु दीपन (Appetizer) और पाचन (Digestive) गुण रखता है। अगरु अजीर्ण, अरुचि और उदर शूल में राहत देता है। अगरु पाचक अग्नि को प्रदीप्त करता है। अगरु पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है और भूख बढ़ाता है।

हृदय रोग में (Agaru for heart disorders)

अगरु हृद्य (Cardiac Tonic) है। अगरु हृदय को बल देता है और हृदय की कार्यक्षमता को सुधारता है। अगरु हृदय की धड़कन की अनियमितता में लाभकारी हो सकता है। अगरु हृदय के ऊतकों को पोषण देता है। अगरु मन और हृदय दोनों को शांत करता है।

मूत्र रोग में (Agaru for urinary disorders)

अगरु मूत्र संबंधी विकारों में फायदेमंद है। अगरु मूत्र मार्ग के संक्रमण में लाभकारी है। अगरु मूत्र की जलन और दर्द को कम करता है। अगरु मूत्रल (Diuretic) गुण रखता है। अगरु मूत्राशय को स्वस्थ रखता है।

मानसिक रोग में (Agaru for mental disorders)

अगरु मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है। अगरु मेध्य (Brain Tonic) गुण रखता है। अगरु की सुगंध मन को शांत करती है, तनाव और चिंता को दूर करती है। अगरु का धूप मानसिक अवसाद में लाभकारी है। अगरु नींद न आने की समस्या (Insomnia) में भी सहायक है। अगरु ध्यान और योग के दौरान मन को एकाग्र करने में मदद करता है।

स्त्री रोग में (Agaru for gynecological disorders)

अगरु महिलाओं के कुछ विशेष रोगों में लाभकारी है। अगरु गर्भाशय को बल देता है। अगरु कष्टार्तव (Dysmenorrhea — दर्दनाक मासिक धर्म) में लाभकारी है। अगरु वात जनित स्त्री रोगों में सहायक है। अगरु से निर्मित तेल का बाहरी उपयोग पेल्विक दर्द में राहत देता है।

यकृत रोग में (Agaru for liver disorders)

अगरु यकृत के लिए लाभकारी है। अगरु यकृत की कार्यक्षमता को सुधारता है। अगरु यकृत की सूजन को कम करता है। अगरु शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में यकृत की सहायता करता है।

दांत और मुँह में (Agaru for teeth and mouth)

अगरु दांत और मुँह के रोगों में लाभकारी है। अगरु की लकड़ी से दातुन करने से दांत मजबूत होते हैं। अगरु के काढ़े से कुल्ला करने से मुँह के छाले और मसूड़ों की सूजन में आराम मिलता है। अगरु मुँह की दुर्गंध को दूर करता है। अगरु की सुगंध मुँह को ताजगी देती है।

विष में (Agaru for poison)

अगरु विषहर (Antidote) गुण रखता है। अगरु शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। अगरु कीड़े के काटने और विष के हल्के प्रभाव में उपयोगी है। अगरु का उपयोग विषघ्न के रूप में आयुर्वेदिक ग्रंथों में वर्णित है।

सिरदर्द में (Agaru for headache)

अगरु सिरदर्द में लाभकारी है। अगरु के तेल को माथे पर लगाने से कफ और वात जनित सिरदर्द में राहत मिलती है। अगरु की सुगंध का अनुभव करने से तनाव जनित सिरदर्द कम होता है। अगरु का धूप सिरदर्द में आराम देता है।

कृमि रोग में (Agaru for worms)

अगरु कृमिघ्न (Anthelmintic) गुण रखता है। अगरु पेट के कीड़ों को नष्ट करने में सहायक है। अगरु का काढ़ा कृमि रोग में उपयोगी है। अगरु आँतों को स्वस्थ रखता है।

उपयोगी अंग (भाग) (Important parts of Agaru)

  • लकड़ी / काष्ठ (Wood) — सर्वाधिक महत्वपूर्ण, राल युक्त भारी लकड़ी
  • तेल (Essential Oil) — बाहरी उपयोग और सुगंध के लिए
  • धूप / धुआँ (Fumigation) — श्वसन और मानसिक रोगों के लिए
  • चूर्ण (Powder) — आंतरिक सेवन के लिए
  • काढ़ा (Decoction) — ज्वर, कफ और पाचन विकारों के लिए
  • राल (Resin) — सुगंध और औषधीय प्रयोजन के लिए

सेवन मात्रा (Dosages of Agaru)

  • चूर्ण (Powder) — 1–3 ग्राम दिन में दो बार
  • काढ़ा (Decoction) — 20–40 मिली दिन में दो बार
  • तेल (Oil) — बाहरी उपयोग हेतु आवश्यकतानुसार
  • धूम्रपान (Dhoomapana) — 1–2 बार, चिकित्सक निर्देशानुसार
  • बच्चों के लिए — 250–500 मिग्रा (5 वर्ष से अधिक, चिकित्सक की सलाह से)
  • अनुपान (Vehicle) — शहद, गर्म पानी या घी के साथ

सावधानियां (Precautions of Agaru)

अगरु उचित मात्रा में उपयोग करने से बहुत लाभकारी है लेकिन कुछ सावधानियां रखना बहुत जरूरी है। अगरु उष्ण वीर्य होने के कारण अत्यधिक पित्त प्रकृति वाले व्यक्तियों में सावधानी से उपयोग करना चाहिए। गर्भावस्था में अगरु का आंतरिक सेवन चिकित्सक की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए। स्तनपान कराने वाली माताओं को भी सावधानी बरतनी चाहिए। अगरु की अधिक मात्रा से उल्टी, मितली और पित्त वृद्धि हो सकती है। बाजार में नकली और मिलावटी अगरु बहुत मिलता है — हमेशा प्रामाणिक स्रोत से ही खरीदें। अगरु एक CITES संरक्षित वनस्पति है — इसका व्यापार केवल लाइसेंस प्राप्त स्रोतों से ही करें। अगरु का बाहरी उपयोग करते समय त्वचा पर पैच टेस्ट करना चाहिए। अगरु से कुछ संवेदनशील व्यक्तियों को एलर्जी हो सकती है। अगरु को हमेशा योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह से लेना चाहिए। अगरु को ठंडे और सूखे स्थान पर रखना चाहिए।

संदर्भ (References)

वैज्ञानिक अध्ययन और शोध पत्र:

  1. Naef R. “The volatile and semi-volatile constituents of agarwood, the infected heartwood of Aquilaria species.” Flavour and Fragrance Journal. 2011; 26(2):73–87. — PubMed
  2. Barden A, Noorainie AA, Mulliken T, Song M. “Heart of the matter: Agarwood use and trade and CITES implementation for Aquilaria malaccensis.” TRAFFIC International, Cambridge, UK. 2000.
  3. Hashim YZHY, Kerr PG, Abbas P, Salleh HM. “Aquilaria spp. (agarwood) as source of health beneficial compounds.” Industrial Crops and Products. 2016; 81:290–314.
  4. Rahman MA, Parvin S. “Medicinal uses and phytochemistry of Aquilaria agallocha Roxb.” Journal of Pharmacognosy and Phytochemistry. 2014; 2(6).

आयुर्वेदिक ग्रंथ संदर्भ:

  • चरक संहिता — सूत्र स्थान अध्याय 5 (मात्राशितीय अध्याय)
  • अष्टांग हृदयम — सूत्र स्थान अध्याय 15
  • भावप्रकाश निघण्टु — कर्पूरादि वर्ग
  • राजनिघण्टु — सुरभिवर्गः
  • द्रव्यगुण विज्ञान — आचार्य प्रियव्रत शर्मा

ऑनलाइन संसाधन:

पुस्तक संदर्भ:

  • Warrier PK, Nambiar VPK, Ramankutty C. “Indian Medicinal Plants: A Compendium of 500 Species.” Orient Longman Publishers. 1996; Vol. 1.
  • Sharma PV. “Dravyaguna Vigyana.” Chaukhamba Bharati Academy, Varanasi. 2006; Vol. 2.
  • Kirtikar KR, Basu BD. “Indian Medicinal Plants.” International Book Distributors, Dehradun. 1987; Vol. 3.

नोट: ये संदर्भ केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए हैं। अगरु एक बहुमूल्य और शक्तिशाली आयुर्वेदिक द्रव्य है और इसका सेवन केवल योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की देखरेख में ही करना चाहिए। अधिक जानकारी के लिए Herbal Arcade और Ayurvedaholic पर जाएँ।