घृतकुमारी: Aloe Vera (Introduction, Benefits, and Usages)
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घृतकुमारी (Aloe Vera: Introduction, Benefits and Usages)

घृतकुमारी क्या है? (What is Aloe Vera?)

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एक ऐसा अद्भुत और चमत्कारी औषधीय पौधा है घृतकुमारी। जिसके बारे में जानकर आप हैरान रह जायेंगे। घृतकुमारी का प्रयोग आयुर्वेद, यूनानी और आधुनिक चिकित्सा में सदियों से किया जाता है। घृतकुमारी मूल रूप से अफ्रीका और अरब प्रायद्वीप का पौधा है। आज यह भारत में राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु सहित लगभग सभी राज्यों में व्यापक रूप से उगाया जाता है।

घृतकुमारी को ‘प्रकृति की संजीवनी’ और ‘चमत्कारी पौधा’ कहा जाता है। घृतकुमारी का उपयोग मुख्य रूप से त्वचा रोग, पाचन विकार, यकृत रोग और बालों की समस्याओं के लिए किया जाता है। घृतकुमारी के पत्तों के भीतर एक पारदर्शी जेल (Gel) होता है जो 99% पानी और 1% सक्रिय यौगिकों से मिलकर बना होता है — यही जेल इसका सबसे महत्वपूर्ण औषधीय भाग है।

ज़्यादा जानें:

घृतकुमारी को आप किसी भी तरह से उपयोग करें तो आपको हर तरफ से लाभ मिलता है। घृतकुमारी एक ऐसा पौधा है जिसे घर में गमले में भी आसानी से उगाया जा सकता है और यह सदैव उपलब्ध रह सकता है। आयुर्वेद में इसे ‘कुमारी’ कहा गया है — इसका अर्थ है ‘कन्या’ अर्थात यह पौधा हमेशा युवा और ताजा रखता है। घृतकुमारी को ‘घृत’ इसलिए कहा गया है क्योंकि इसके पत्तों में घी जैसा चिकना और पोषक जेल होता है।

घृतकुमारी एक बहुउद्देशीय औषधि है जो आंतरिक और बाहरी दोनों रूप में उपयोगी है। यह एक प्राकृतिक औषधि है जो विशेष रूप से त्वचा विकारों, पाचन समस्याओं और यकृत रोगों के लिए अत्यंत गुणकारी होती है।

घृतकुमारी का बाह्यस्वरूप (Morphology of Aloe Vera)

घृतकुमारी एक बहुवर्षीय (Perennial), रसीला (Succulent) पौधा है जो 60–100 सेमी तक ऊँचा होता है। इसका तना बहुत छोटा या लगभग अनुपस्थित होता है। घृतकुमारी के पत्ते मोटे, मांसल, भाले जैसे (lanceolate), 30–50 सेमी लंबे होते हैं। पत्तों के किनारों पर छोटे-छोटे दांतेदार काँटे होते हैं। पत्तों का रंग हरा-धूसर होता है और कुछ किस्मों में सफेद धब्बे होते हैं।

घृतकुमारी के पत्तों की संरचना तीन परतों में होती है — बाहरी हरी परत (Rind), मध्य परत में पीला-कड़वा रस (Latex/Aloin) और सबसे भीतर पारदर्शी, चिकना जेल (Gel/Pulp) जो औषधीय दृष्टि से सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। घृतकुमारी के फूल लंबे डंठल पर पीले, नारंगी या लाल रंग के नलिकाकार होते हैं। फूल गर्मी के मौसम में खिलते हैं।

घृतकुमारी के सामान्य नाम (Common names of Aloe Vera)

भाषानाम
वानस्पतिक नाम (Botanical Name)Aloe barbadensis Miller (Aloe vera)
अंग्रेजी (English)Aloe Vera, True Aloe, Barbados Aloe
हिंदी (Hindi)घृतकुमारी, ग्वारपाठा, घीकुआर
संस्कृत (Sanskrit)घृतकुमारी, कुमारी, स्थूलदला, गृहकन्या, देवी
अन्य (Other)কুমারী (बंगाली — Kumari), कोरफड (मराठी — Korphad), કુંવારપાઠું (गुजराती — Kunwarpatha), கற்றாழை (तमिल — Katrazhai), కలబంద (तेलुगु — Kalabanda), ಲೋಳೆಸರ (कन्नड़ — Lolesara), ਕੁਆਰਗੰਦਲ (पंजाबी — Kuarganal), Sibr (अरबी)
कुल (Family)Asphodelaceae (Liliaceae)
उत्पत्ति (Origin)उत्तरी अफ्रीका, अरब प्रायद्वीप

घृतकुमारी के आयुर्वेदिक गुणधर्म (Ayurvedic Properties of Aloe Vera)

गुणधर्मविवरण
दोष (Dosha)त्रिदोष शामक — वात, पित्त और कफ तीनों को संतुलित करता है
रस (Taste)तिक्त (Bitter), मधुर (Sweet), कषाय (Astringent)
गुण (Qualities)गुरु (Heavy), स्निग्ध (Unctuous), पिच्छिल (Slimy)
वीर्य (Potency)शीत (Cold)
विपाक (Post Digestion Effect)मधुर (Sweet)
प्रभाव (Special Action)यकृत्तुत्तेजक (Liver Stimulant), रक्तशोधक, रसायन
अन्य (Others)कुमारी, स्नेहन, विरेचन, रक्तशोधक, शोथहर, व्रणरोपक, यकृत्य

घृतकुमारी के पोषक तत्व (Nutritional Value of Aloe Vera)

घृतकुमारी के जेल में 75 से अधिक सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं:

पोषक तत्व / यौगिकविवरण
विटामिन (Vitamins)विटामिन A, C, E, B1, B2, B3, B6, B12, फोलिक एसिड
खनिज (Minerals)कैल्शियम, मैग्नीशियम, जिंक, क्रोमियम, सेलेनियम, सोडियम, पोटैशियम, आयरन
एंजाइम (Enzymes)Aliiase, Alkaline Phosphatase, Amylase, Lipase, Cellulase
शर्करा (Sugars)Monosaccharides, Polysaccharides (Acemannan)
एंथ्राक्विनोन (Anthraquinones)Aloin, Emodin (Latex में — रेचक गुण)
फैटी एसिड (Fatty Acids)Campesterol, Sitosterol, HCL Cholesterol
हार्मोन (Hormones)Auxins, Gibberellins (घाव भरने में सहायक)
अमिनो एसिड (Amino Acids)20 में से 18 अमिनो एसिड उपस्थित

घृतकुमारी के औषधीय फायदे एवं उपयोग (Benefits and Usages of Aloe Vera)

त्वचा रोग में घृतकुमारी (Aloe Vera for skin diseases)

घृतकुमारी त्वचा रोगों में सबसे अधिक प्रसिद्ध और प्रभावी औषधि है। घृतकुमारी में त्वच्य (Skin Tonic) गुण होते हैं। घृतकुमारी का जेल सोरायसिस, एक्जिमा, दाद, खाज और खुजली में अत्यंत प्रभावी है। घृतकुमारी त्वचा को गहरी नमी देती है और रूखेपन को दूर करती है। घृतकुमारी में एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण होते हैं जो त्वचा के संक्रमण को रोकते हैं। घृतकुमारी दाग-धब्बों को दूर करती है और त्वचा को चमकदार बनाती है। घृतकुमारी झुर्रियों को कम करती है और त्वचा की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करती है। घृतकुमारी सनबर्न में तुरंत राहत देती है।

जलने और घाव में (Aloe Vera for burns and wounds)

घृतकुमारी जलने और घाव के उपचार में अत्यंत प्रभावी है। घृतकुमारी में व्रणरोपक (Wound Healing) गुण होते हैं। घृतकुमारी का जेल जले हुए स्थान पर लगाने से तुरंत ठंडक मिलती है और फफोले नहीं पड़ते। घृतकुमारी में उपस्थित Gibberellins और Auxins घाव भरने की प्रक्रिया को तेज करते हैं। घृतकुमारी घाव में संक्रमण को रोकती है। घृतकुमारी जले हुए स्थान पर निशान नहीं पड़ने देती। घृतकुमारी प्रथम और द्वितीय श्रेणी के जलने में अत्यंत प्रभावी प्राथमिक उपचार है।

पाचन विकार में (Aloe Vera for digestive disorders)

घृतकुमारी पाचन तंत्र के लिए अत्यंत लाभकारी है। घृतकुमारी का रस पीने से अजीर्ण, अम्लपित्त (Acidity), और IBS (Irritable Bowel Syndrome) में राहत मिलती है। घृतकुमारी आँतों की सूजन (Colitis) को कम करती है। घृतकुमारी पाचक एंजाइमों के उत्पादन को बढ़ाती है। घृतकुमारी आँतों में अच्छे बैक्टीरिया (Probiotics) को बढ़ावा देती है। घृतकुमारी भोजन के उचित पाचन और पोषक तत्वों के अवशोषण में सहायक है।

कब्ज में (Aloe Vera for constipation)

घृतकुमारी कब्ज में बहुत प्रभावी है। घृतकुमारी के पत्तों की मध्य परत में उपस्थित Aloin एक प्राकृतिक विरेचक (Laxative) है। घृतकुमारी का जूस आँतों की गतिशीलता को बढ़ाता है। घृतकुमारी मल को नरम करती है और आसान मलत्याग में सहायता करती है। घृतकुमारी पुराने और जीर्ण कब्ज में भी लाभकारी है। घृतकुमारी आँतों को साफ और स्वस्थ रखती है।

मधुमेह में (Aloe Vera for diabetes)

घृतकुमारी मधुमेह के प्रबंधन में अत्यंत उपयोगी है। घृतकुमारी रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करती है। घृतकुमारी में उपस्थित Glucomannan और Phytosterols इंसुलिन संवेदनशीलता को बढ़ाते हैं। घृतकुमारी अग्न्याशय (Pancreas) की कार्यक्षमता को सुधारती है। घृतकुमारी मधुमेह से जुड़े घावों को भरने में भी सहायक है। घृतकुमारी का रस नियमित रूप से पीने से टाइप-2 मधुमेह में लाभ होता है।

यकृत रोग में (Aloe Vera for liver disorders)

घृतकुमारी यकृत (Liver) के लिए अत्यंत लाभकारी है। आयुर्वेद में घृतकुमारी को ‘यकृत्य’ अर्थात यकृत का हितकारी कहा गया है। घृतकुमारी यकृत को विषाक्त पदार्थों से मुक्त करती है। घृतकुमारी यकृत की सूजन को कम करती है। घृतकुमारी फैटी लिवर (Non-Alcoholic Fatty Liver Disease) में लाभकारी है। घृतकुमारी यकृत की कार्यक्षमता को सुधारती है और पित्त स्राव को संतुलित करती है। पीलिया (Jaundice) में घृतकुमारी का रस पीना लाभकारी है।

हृदय रोग में (Aloe Vera for heart disorders)

घृतकुमारी हृदय के लिए लाभकारी है। घृतकुमारी खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करती है और अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) को बढ़ाती है। घृतकुमारी रक्तचाप को नियंत्रित करती है। घृतकुमारी रक्त को पतला करती है जिससे रक्त थक्के (Blood Clots) बनने का जोखिम कम होता है। घृतकुमारी हृदय की कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव क्षति से बचाती है।

बालों में (Aloe Vera for hair)

घृतकुमारी बालों के लिए अत्यंत लाभकारी है। घृतकुमारी बालों की जड़ों को गहरा पोषण देती है। घृतकुमारी बालों का झड़ना कम करती है और नए बालों की वृद्धि को बढ़ावा देती है। घृतकुमारी का जेल बालों में लगाने से डैंड्रफ (रूसी) दूर होती है। घृतकुमारी बालों को मुलायम, चमकदार और स्वस्थ बनाती है। घृतकुमारी सिर की त्वचा (Scalp) के pH को संतुलित रखती है। घृतकुमारी दो मुँहे बालों (Split Ends) को ठीक करने में सहायक है।

आँखों में (Aloe Vera for eyes)

घृतकुमारी आँखों के लिए लाभकारी है। घृतकुमारी का जेल आँखों के चारों ओर लगाने से आँखों की सूजन और काले घेरे (Dark Circles) कम होते हैं। घृतकुमारी आँखों की थकान में राहत देती है। घृतकुमारी में उपस्थित एंटीऑक्सीडेंट आँखों को ऑक्सीडेटिव क्षति से बचाते हैं। घृतकुमारी Conjunctivitis (आँख आना) में भी सहायक है।

जोड़ों के दर्द में (Aloe Vera for joint pain)

घृतकुमारी जोड़ों के दर्द में अत्यंत फायदेमंद है। घृतकुमारी का जेल जोड़ों पर लगाने से दर्द और सूजन में शीघ्र राहत मिलती है। घृतकुमारी संधिवात (Rheumatoid Arthritis) और ऑस्टियोआर्थराइटिस में सहायक है। घृतकुमारी का रस पीने से शरीर की आंतरिक सूजन कम होती है। घृतकुमारी जोड़ों की गतिशीलता को बढ़ाती है।

सूजन में (Aloe Vera for inflammation)

घृतकुमारी में शक्तिशाली सूजन-रोधी (Anti-inflammatory) गुण होते हैं। घृतकुमारी में C-glucosyl chromone नामक यौगिक सूजन को कम करता है। घृतकुमारी शरीर की आंतरिक और बाहरी दोनों प्रकार की सूजन में लाभकारी है। घृतकुमारी सूजन से उत्पन्न होने वाले दर्द को भी कम करती है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता में (Aloe Vera for immunity)

घृतकुमारी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है। घृतकुमारी में उपस्थित Acemannan (Polysaccharide) प्रतिरक्षा तंत्र को सक्रिय करता है। घृतकुमारी श्वेत रक्त कोशिकाओं (WBC) की गतिविधि को बढ़ाती है। घृतकुमारी एंटीवायरल और एंटीबैक्टीरियल गुण रखती है। घृतकुमारी का नियमित सेवन बार-बार बीमार पड़ने की प्रवृत्ति को कम करता है।

मुँह के रोग में (Aloe Vera for mouth disorders)

घृतकुमारी मुँह के रोगों में अत्यंत लाभकारी है। घृतकुमारी के जेल से कुल्ला करने से मुँह के छाले (Mouth Ulcers) में शीघ्र राहत मिलती है। घृतकुमारी मसूड़ों की सूजन (Gingivitis) और मसूड़ों से खून आने में लाभकारी है। घृतकुमारी दांत दर्द में भी राहत देती है। घृतकुमारी मुँह की दुर्गंध को दूर करती है। घृतकुमारी Plaque को कम करने में सहायक है।

मोटापे में (Aloe Vera for obesity)

घृतकुमारी वजन प्रबंधन में सहायक है। घृतकुमारी का रस पाचन को सुधारता है और मेटाबोलिज्म को बढ़ाता है। घृतकुमारी शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालती है जिससे वजन कम होने में मदद मिलती है। घृतकुमारी रक्त शर्करा को नियंत्रित करके अनावश्यक चर्बी को जमा होने से रोकती है। घृतकुमारी का सुबह खाली पेट जूस पीने से वजन प्रबंधन में विशेष लाभ होता है।

स्त्री रोग में (Aloe Vera for gynecological disorders)

घृतकुमारी महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए विशेष रूप से लाभकारी है। घृतकुमारी कष्टार्तव (Dysmenorrhea — दर्दनाक मासिक धर्म) में लाभकारी है। घृतकुमारी PCOS (Polycystic Ovary Syndrome) में हार्मोनल संतुलन बनाए रखने में सहायक है। घृतकुमारी श्वेत प्रदर (Leucorrhea) में लाभकारी है। घृतकुमारी गर्भाशय को बल देती है और महिलाओं की सामान्य कमजोरी को दूर करती है। रजोनिवृत्ति (Menopause) के लक्षणों में भी घृतकुमारी राहत देती है।

कैंसर रोधी गुण (Anti-cancer properties of Aloe Vera)

घृतकुमारी में शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट और कैंसर रोधी गुण होते हैं। घृतकुमारी में उपस्थित Emodin और Acemannan कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकने में सहायक हो सकते हैं। घृतकुमारी कीमोथेरेपी के दुष्प्रभावों को कम करने में सहायक है। घृतकुमारी ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करके DNA क्षति से बचाती है। ध्यान रहे — घृतकुमारी कैंसर का उपचार नहीं है, यह केवल सहायक चिकित्सा के रूप में उपयोगी है।

उपयोगी अंग (भाग) (Important parts of Aloe Vera)

  • जेल (Gel/Pulp) — सर्वाधिक महत्वपूर्ण, आंतरिक और बाहरी दोनों उपयोग के लिए
  • रस (Juice) — आंतरिक सेवन के लिए, यकृत और पाचन के लिए
  • लेटेक्स (Latex/Aloin) — पत्तों की मध्य परत, विरेचक गुण के लिए
  • पत्ते (Leaves) — संपूर्ण पत्ता विभिन्न प्रयोजनों के लिए
  • जड़ (Root) — कुछ विशेष आयुर्वेदिक योगों में उपयोगी

सेवन मात्रा (Dosages of Aloe Vera)

  • ताजा जेल (Fresh Gel) — 1–2 चम्मच (10–20 ग्राम) दिन में दो बार
  • घृतकुमारी रस (Juice) — 20–30 मिली, गर्म पानी के साथ, खाली पेट
  • बाजार में उपलब्ध जूस — 15–30 मिली प्रतिदिन (निर्माता निर्देशानुसार)
  • बाहरी उपयोग (Topical) — आवश्यकतानुसार सीधे त्वचा या बालों पर
  • बच्चों के लिए — 5–10 मिली रस (5 वर्ष से अधिक, चिकित्सक की सलाह से)
  • वृद्धों के लिए — 15–20 मिली रस प्रतिदिन
  • सर्वोत्तम समय — सुबह खाली पेट, भोजन से 30 मिनट पूर्व

सावधानियां (Precautions of Aloe Vera)

घृतकुमारी उचित मात्रा में उपयोग करने से बहुत लाभकारी है लेकिन कुछ सावधानियां रखना बहुत जरूरी है। गर्भावस्था में घृतकुमारी का आंतरिक सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए क्योंकि इसके विरेचक गुण गर्भाशय संकुचन उत्पन्न कर सकते हैं। स्तनपान कराने वाली माताओं को भी घृतकुमारी के आंतरिक सेवन से बचना चाहिए। छोटे बच्चों को घृतकुमारी का रस चिकित्सक की सलाह के बिना नहीं देना चाहिए। घृतकुमारी के लेटेक्स (Aloin) का अत्यधिक सेवन गुर्दे को नुकसान पहुँचा सकता है — इसलिए Aloin-free Aloe Vera Juice ही लें। घृतकुमारी का दीर्घकालिक अत्यधिक सेवन इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन पैदा कर सकता है। मधुमेह की दवा लेने वाले रोगी घृतकुमारी सावधानी से लें क्योंकि यह रक्त शर्करा को और कम कर सकती है। घृतकुमारी से एलर्जी वाले व्यक्तियों को बाहरी उपयोग से पहले पैच टेस्ट करना चाहिए। किडनी की बीमारी वाले रोगियों को घृतकुमारी चिकित्सक की सलाह से ही लेनी चाहिए। घृतकुमारी को हमेशा ताजा उपयोग करें — कटे हुए पत्ते का जेल 24 घंटे के भीतर उपयोग करें। बाजार से हमेशा प्रामाणिक और GMP प्रमाणित उत्पाद ही खरीदें।

संदर्भ (References)

वैज्ञानिक अध्ययन और शोध पत्र:

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आयुर्वेदिक ग्रंथ संदर्भ:

  • चरक संहिता — सूत्र स्थान, चिकित्सा स्थान
  • भावप्रकाश निघण्टु — गुडूच्यादि वर्ग
  • राजनिघण्टु — शाकादि वर्ग
  • अष्टांग हृदयम — चिकित्सा स्थान
  • द्रव्यगुण विज्ञान — आचार्य प्रियव्रत शर्मा

ऑनलाइन संसाधन:

पुस्तक संदर्भ:

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  • Warrier PK, Nambiar VPK, Ramankutty C. “Indian Medicinal Plants: A Compendium of 500 Species.” Orient Longman Publishers. 1996.
  • Bhavamishra. “Bhavaprakasha Nighantu.” Chaukhamba Sanskrit Bhawan, Varanasi. 2010.
  • Reynolds T. “Aloe Vera Leaf Gel: A Review Update.” Journal of Ethnopharmacology. 1999; 68(1–3):3–37.

नोट: ये संदर्भ केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए हैं। घृतकुमारी एक अत्यंत गुणकारी और बहुउपयोगी औषधीय पौधा है। यदि आपको कोई विशेष स्वास्थ्य समस्या है तो घृतकुमारी के औषधीय उपयोग से पहले योग्य आयुर्वेदिक या आधुनिक चिकित्सक की सलाह अवश्य लें। अधिक जानकारी के लिए Herbal Arcade और Ayurvedaholic पर जाएँ।