Khadiradi Vati: A cure for all diseases related to mouth, know its 11 benefits
खदिरादि वटी का परिचय (KHADIRADI VATI introduction: Benefits, Dosage)
खदिरादि वटी क्या होती हैं?? (Khadiradi vati kya hai??)
यह एक आयुर्वेदिक औषधि होती हैं जो वटी अर्थात गोलियों क रूप में होती हैं| इस वटी का मुख्य घटक कत्था होता हैं जिसे खैरसार भी कहा जाता हैं| इसमें खैरसार होने के कारण ही इसे खदिरादि वटी कहा जाता हैं| इस वटी का प्रयोग मुख्य रूप से मुंह में होने वाली समस्याओं के लिए किया जाता हैं| दांत के रोग, होंठ, जीभ, तालु और स्वरभंग जैसे कई रोगों में इसका प्रयोग किया जाता हैं| गले में दर्द या खराश, मुंह से दुर्गन्ध जैसी समस्या को भी इस औषधि के नियमित सेवन से खत्म किया जाता हैं|
खदिरादि वटी के घटक द्रव्य (Khadiradi vati ke ghatak)
- कत्था या खैरसार
- Water
- mace
- Kapoor
- Smooth betel nut
- Kankol

खदिरादि वटी बनाने की विधि (Khadiradi vati banane ki vidhi)
इस औषधि को बनाने के लिए कत्था या खैरसार को उचित जल की मात्रा में डाल कर पकाना होगा| डाले गये जल का आठवां भाग शेष रह जाने पर जावित्री, कपूर, चिकनी सुपारी और कंकोल का बारीक चूर्ण कर के इन्हें मिला कर गोलियां बना लें| तथा इन्हें छाया में सुखा दें| सूखने के बाद तैयार औषधि खादिरादि वटी हैं| अब इसका सेवन किया जा सकता हैं|
खदिरादि वटी के फायदें और उपयोग (Khadiradi vati ke fayde)
मुंह के छालो को खत्म करें
यदि किसी कारणवश मुंह में छाले हो जाते हैं तथा कई दिनों के रहने के बाद यह पकने लगते हैं जिससे व्यक्ति को तेज पीड़ा से गुजरना पड़ता हैं| खादिरादि वटी का सेवन करने से किसी भी प्रकार के मुहं के छालो को खत्म किया जा सकता हैं और रोगी को आराम मिलता हैं| इस वटी का सेवन करने के लिए इसे चूसना चाहिए|
साँसों की दुर्गन्ध को समाप्त करें
कई बार ऐसा होता हैं की बोलते समय मुंह से दुर्गन्ध आने लगती हैं| कभी कभी यह दुर्गन्ध बहुत बढ़ जाती हैं| खादिरादि वटी को चूसने से सांसो की दुर्गन्ध को बड़ी आसानी से दूर किया जा सकता हैं और मुंह को सुगन्धित किया जा सकता हैं|

स्वर भंग में लाभदायक
जोर से चिल्लाने या कभी कभी सिर्फ जोर से बोल देने पर ही व्यक्ति की आवाज़ बैठ जाती हैं| इस समस्या को यदि आप जड़ से और जल्द से जल्द खत्म कर के आराम पाना चाहते हैं तो आपको खादिरादि वटी का सेवन करना चाहिए| यह वटी मुख्य रूप से मुख के रोगों के लिए ही बनायीं जाती हैं इस कारण इसका उपयोग स्वर भंग में भी किया जा सकता हैं|
दांत के रोग को खत्म करें
कई लोगो को दांतों में अलग अलग तरह की समस्या होती हैं जैसे थोडा सा भी ठंडा या गरम खाने पर दांतों में झनझनाहट महसूस होना या दांतों में कीड़े लगना, दांतों में अकारण ही क्षय होना आदि| दांतों से जुडी हुई हर समस्या या हर रोग को जड़ से खत्म करने के लिए खादिरादि वटी का प्रयोग उत्तम रहता हैं| जिनके दांत बहुत ज्यादा गंदे रहते हैं तो इस स्थिति में भी इसका सेवन उचित रहता हैं|
होंठो से जुडी समस्या समाप्त करें
खादिरादि वटी का सेवन करने से होंठो से जुडी सभी प्रकार की समस्याएँ खत्म की जाती हैं| होंठो का सूखना, होंठ पर घाव, होंठ पर एलर्जी जैसी कई समस्याओं का समाधान यह एक वटी कर सकती हैं| इस वटी के उचित मात्रा में नियमित सेवन से होंठो से जुडी सारीसमस्याओं को खत्म किया जा सकता हैं|
जिह्वा के विकार को खत्म करें
अधिक खट्टा खाने या अधिक मात्रा में शराब का सेवन करने से जीभ फट जाती हैं| तो इस स्थिति में खादिरादि वटी का सेवन करके जिह्वा से जुड़े विकार को खत्म किया जा सकता हैं| जीभ के दर्द के लिए भी यह वटी उत्तम औषधि का कार्य करती हैं|
कफ को संतुलित करें
वैसे तो कफ का हमारे शरीर में होना एक आम बात हैं| परन्तु जब कफ की मात्रा शरीर में बढ़ जाये तो खांसी, जुखाम और सांस लेने में परेशानी भी आने लगती हैं| खादिरादि वटी शरीर में कफ को संतुलित करती हैं| जिससे मुख्य रूप से सांस लेने में आ रही समस्या खत्म हो जाती हैं| औषधि को नियमित रूप से चूसने पर यह समस्या जड़ से खत्म हो जाती हैं|
मुंह सूखने की समस्या का समाधान
मुंह सूखने की समस्या होने पर व्यक्ति को बार बार पानी पिने की जरुरत पड़ती रहती हैं| जब मुंह में लार बनने की प्रक्रिया कम हो जाती हैं तो ऐसे में यह समस्या आती हैं| इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए खादिरादि वटी बहुत अच्छी रहती क्योंकि यह मुख से जुड़े हुए लगभग सभी रोगों को खत्म कर देती हैं|
गले के दर्द में लाभदायक
गले में किसी कारण हो रहे संक्रमण या टॉन्सिल के कारण गले में दर्द और खराश हो सकती हैं| इस दर्द से आराम पाने के लिए खादिरादि वटी का प्रयोग करना चाहिए| गले के पीछे दो ऊतकों में आ रही सूजन टॉन्सिल होने का कारण होती हैं| इस वटी के प्रयोग से तौन्सिल को भी जड़ से खत्म किया जा सकता हैं|
मुंह का स्वाद बिगड़ने पर लाभदायक
कभी कभी शरीर मी परिवर्तन या खान पान में परिवर्तन के कारण मुंह का स्वाद बिगड़ जाता हैं| स्वाद बिगड़ने के कारण कोई भी चीज़ खाने की इच्छा नही होती| खादिरादि वटी की एक से दो गोली को चूसने पर मुहं का स्वाद वापस आ जाता हैं| और मुंह का जायका ठीक हो जाता हैं|
मसूड़े की समस्या से छुटकारा
जब किसी कारण से मसूड़ों में दर्द हो या खून निकलता हो, या मसूड़े कमजोर हो गये हैं तो खादिरादि वटी का सेवन करने से मसूड़ों को मजबूत बनाया जा सकता हैं| खादिरादि वटी मसूड़ों के लिए बहुत ही कारगर औषधि हैं| मसूड़ों की समस्या से झुझ रहे किसी भी व्यक्ति को इसका सेवन जरुर करना चाहिए|
खदिरादि वटी की सेवन विधि और मात्रा (Khadiradi vati ki sevan vidhi)
- खादिरादि वटी की एक बार में एक ही गोली चूसनी चाहिए|
- एक दिन में अधिकतम 4 गोलियों का सेवन किया जा सकता हैं|
- इसका सेवन सदैव चूस कर ही करना चाहिए ना की निगल कर|
खदिरादि वटी का सेवन करते समय रखी जाने वाली सावधानियाँ (Khadiradi vati ke sevan ki savdhaniya)
- औषधि को बच्चो की पहुँच से दूर रखे|
- अधिक मात्रा में इसका सेवन करने पर पेट में जलन या उल्टी हो सकती हैं|
खदिरादि वटी की उपलब्धता (Khadiradi vati ki uplabdhta)
- दिव्य खदिरादि वटी (DIVYA PHARMACY KHADIRADI VATI)
- बैधनाथ खदिरादि वटी (BAIDYANATH KHADIRADI VATI)
- झंडू खदिरादि वटी (ZANDU KHADIRADI VATI)
- धनवंतरी खदिरादि वटी (DHANVANTRI KHADIRADI VATI)
- आयुर्वेदा 24 खदिरादि वटी (AYURVEDA 24 KHADIRADI VATI)
- दीप आयुर्वेदा खदिरादि वटी (DEEP AYURVEDA KHADIRADI VATI)
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