Arjunarishta: Introduction, Benefits and Usages
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अर्जुनारिष्ट: (Arjunarishta: Introduction, Benefits and Usages)

अर्जुनारिष्ट क्या है? (What is Arjunarishta?)

Table of Contents

अर्जुनारिष्ट एक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक औषधि है जो विशेष रूप से हृदय रोगों के उपचार के लिए प्रयोग की जाती है। यह एक हर्बल अरिष्ट (fermented preparation) है जिसका मुख्य घटक अर्जुन की छाल है। अर्जुनारिष्ट का उल्लेख प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों जैसे भैषज्य रत्नावली और योगरत्नाकर में मिलता है।

अर्जुनारिष्ट को हृदय की सर्वोत्तम टॉनिक माना जाता है। यह हृदय की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है, हृदय की कार्यक्षमता को बढ़ाता है और विभिन्न हृदय विकारों में अत्यंत लाभकारी है। अर्जुनारिष्ट का नियमित सेवन हृदय को स्वस्थ रखता है और हृदय रोग से बचाव करता है।

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अर्जुनारिष्ट एक तरल औषधि है जो किण्वन प्रक्रिया द्वारा तैयार की जाती है। इसमें अर्जुन की छाल के अलावा अनेक अन्य औषधीय द्रव्य होते हैं जो इसके प्रभाव को बढ़ाते हैं। यह औषधि पूरी तरह से प्राकृतिक है और दीर्घकालिक उपयोग के लिए सुरक्षित है। अर्जुनारिष्ट का स्वाद हल्का मीठा और कसैला होता है।

आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने भी अर्जुनारिष्ट के हृदय पर होने वाले लाभकारी प्रभावों को स्वीकार किया है। यह हृदय की रक्त पंपिंग क्षमता को बढ़ाता है, रक्तचाप को नियंत्रित करता है और हृदय की समग्र सेहत में सुधार लाता है।

अर्जुनारिष्ट की संरचना (Composition of Arjunarishta)

अर्जुनारिष्ट में निम्नलिखित प्रमुख औषधीय द्रव्य होते हैं:

  • अर्जुन छाल (Arjuna bark) – मुख्य घटक
  • धातकी पुष्प (Dhataki flowers)
  • मधुक पुष्प (Madhuka flowers)
  • द्राक्षा (Grapes/Raisins)
  • गुड़ या शक्कर (Jaggery or Sugar)
  • मदनफल (Madenphala)
  • आमलकी (Amla)
  • त्रिफला (Triphala)

इन सभी द्रव्यों को विशेष आयुर्वेदिक विधि से मिलाकर और किण्वन प्रक्रिया के माध्यम से अर्जुनारिष्ट तैयार किया जाता है।

अर्जुनारिष्ट के सामान्य नाम (Common names of Arjunarishta)

भाषानाम
संस्कृत (Sanskrit)अर्जुनारिष्ट, पार्थारिष्ट
हिंदी (Hindi)अर्जुनारिष्ट
अंग्रेजी (English)Arjunarishta, Arjuna Aristha
मराठी (Marathi)अर्जुनारिष्ट
गुजराती (Gujarati)અર્જુનારિષ્ટ
तमिल (Tamil)அர்ஜுனாரிஷ்டம்
तेलुगु (Telugu)అర్జునారిష్టం
कन्नड़ (Kannada)ಅರ್ಜುನಾರಿಷ್ಟ
मलयालम (Malayalam)അർജുനാരിഷ്ടം

अर्जुनारिष्ट के आयुर्वेदिक गुणधर्म (Ayurvedic Properties of Arjunarishta)

गुणधर्मविवरण
दोष (Dosha)त्रिदोष शामक (विशेषकर कफ-पित्त शामक)
रस (Taste)कषाय (Astringent), मधुर (Sweet)
गुण (Qualities)लघु (Light), रूक्ष (Dry)
वीर्य (Potency)शीत (Cold)
विपाक (Post Digestion Effect)कटु (Pungent)
प्रभाव (Effect)हृद्य (Cardiotonic), बल्य (Strengthening), दीपन (Appetizer), पाचन (Digestive), रक्तस्तम्भक (Hemostatic)

अर्जुनारिष्ट के औषधीय फायदे एवं उपयोग (Benefits and Usages of Arjunarishta)

हृदय रोग में अर्जुनारिष्ट (Arjunarishta for heart diseases)

अर्जुनारिष्ट हृदय रोगों के लिए सबसे उत्तम आयुर्वेदिक औषधि है। यह हृदय की मांसपेशियों को शक्ति प्रदान करता है और हृदय की कार्यक्षमता को बढ़ाता है। अर्जुनारिष्ट हृदय के सभी प्रकार के विकारों में लाभकारी है। यह हृदय की कमजोरी को दूर करता है और हृदय को मजबूत बनाता है।

हृदय में दर्द, सीने में भारीपन, सांस फूलना और हृदय संबंधी अन्य लक्षणों में अर्जुनारिष्ट का नियमित सेवन करने से लाभ होता है। यह हृदय तक रक्त संचार को बेहतर बनाता है और हृदय की कोशिकाओं को पोषण देता है। अर्जुनारिष्ट हृदय की रक्त पंपिंग क्षमता को बढ़ाता है और हृदय की धड़कन को नियमित करता है।

कोरोनरी आर्टरी डिजीज, कंजेस्टिव हार्ट फेलियर और अन्य हृदय विकारों में अर्जुनारिष्ट का उपयोग बहुत प्रभावी है। यह हृदय के वाल्वों को स्वस्थ रखता है और हृदय की समग्र सेहत में सुधार लाता है।

एंजाइना में (Arjunarishta for angina)

एंजाइना यानी हृदय में दर्द की स्थिति में अर्जुनारिष्ट अत्यंत लाभकारी है। यह हृदय की धमनियों में रक्त प्रवाह को बढ़ाता है और हृदय को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलने में मदद करता है। अर्जुनारिष्ट के नियमित सेवन से एंजाइना के दौरे कम होते हैं और दर्द की तीव्रता घटती है।

यह हृदय की मांसपेशियों को आराम देता है और हृदय पर पड़ने वाले दबाव को कम करता है। एंजाइना के रोगियों को अर्जुनारिष्ट का सेवन चिकित्सक की देखरेख में करना चाहिए।

हार्ट फेलियर में (Arjunarishta for heart failure)

हार्ट फेलियर यानी हृदय की विफलता में अर्जुनारिष्ट सहायक औषधि के रूप में काम करता है। यह हृदय की पंपिंग क्षमता को बढ़ाता है और शरीर के विभिन्न अंगों तक रक्त संचार को सुधारता है। अर्जुनारिष्ट हृदय की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है और हृदय को काम करने की शक्ति देता है।

यह फेफड़ों और पैरों में होने वाली सूजन को कम करता है जो हार्ट फेलियर का सामान्य लक्षण है। अर्जुनारिष्ट के नियमित सेवन से हार्ट फेलियर के लक्षणों में सुधार होता है और जीवन की गुणवत्ता बेहतर होती है।

हृदय की धड़कन में (Arjunarishta for palpitations)

हृदय की धड़कन का तेज होना, अनियमित धड़कन या घबराहट में अर्जुनारिष्ट लाभदायक है। यह हृदय की धड़कन को नियमित करता है और हृदय को शांति प्रदान करता है। अर्जुनारिष्ट तनाव और चिंता के कारण होने वाली हृदय की समस्याओं में भी राहत देता है।

यह हृदय की विद्युत गतिविधि को संतुलित करता है और हृदय की लय को सामान्य बनाता है। अर्जुनारिष्ट का सेवन करने से घबराहट और बेचैनी कम होती है।

रक्तचाप में (Arjunarishta for blood pressure)

उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में अर्जुनारिष्ट बहुत प्रभावी है। यह रक्त वाहिकाओं को शिथिल करता है और रक्तचाप को सामान्य स्तर पर लाता है। अर्जुनारिष्ट का नियमित सेवन करने से उच्च रक्तचाप धीरे-धीरे नियंत्रित होता है।

यह रक्त वाहिकाओं की दीवारों को मजबूत बनाता है और रक्त संचार को सुचारू करता है। अर्जुनारिष्ट दीर्घकालिक उपयोग के लिए सुरक्षित है और बिना किसी दुष्प्रभाव के रक्तचाप को नियंत्रित करता है।

कोलेस्ट्रॉल में (Arjunarishta for cholesterol)

अर्जुनारिष्ट रक्त में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में सहायक है। यह खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करता है और अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) को बढ़ाता है। अर्जुनारिष्ट ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर को भी नियंत्रित करता है।

यह रक्त वाहिकाओं में जमा होने वाले कोलेस्ट्रॉल को हटाने में मदद करता है और एथेरोस्क्लेरोसिस से बचाता है। नियमित सेवन से हृदय रोग का खतरा काफी कम हो जाता है।

रक्त संचार में (Arjunarishta for blood circulation)

अर्जुनारिष्ट पूरे शरीर में रक्त संचार को बेहतर बनाता है। यह रक्त वाहिकाओं को स्वस्थ रखता है और रक्त प्रवाह को सुचारू करता है। हाथ-पैरों में ठंडापन, सुन्नपन और अन्य रक्त संचार संबंधी समस्याओं में अर्जुनारिष्ट लाभकारी है।

यह रक्त को पतला रखता है और रक्त के थक्के बनने से रोकता है। अर्जुनारिष्ट शरीर के सभी अंगों तक पर्याप्त रक्त और ऑक्सीजन पहुंचाने में मदद करता है।

रक्त विकार में (Arjunarishta for blood disorders)

अर्जुनारिष्ट रक्त को शुद्ध करता है और रक्त विकारों में लाभकारी है। यह रक्त में हीमोग्लोबिन के स्तर को बढ़ाता है और खून की कमी को दूर करता है। अर्जुनारिष्ट रक्त की गुणवत्ता में सुधार लाता है।

रक्तस्राव, रक्तपित्त और अन्य रक्त विकारों में भी अर्जुनारिष्ट उपयोगी है। यह रक्त वाहिकाओं को मजबूत बनाता है और अनावश्यक रक्तस्राव को रोकता है।

खांसी में (Arjunarishta for cough)

खांसी और कफ की समस्या में अर्जुनारिष्ट लाभदायक हो सकता है। यह श्वसन तंत्र को मजबूत बनाता है और कफ को बाहर निकालने में मदद करता है। पुरानी खांसी में अर्जुनारिष्ट का सेवन राहत देता है।

श्वास रोग में (Arjunarishta for asthma)

श्वास रोग या दमा में जब हृदय पर भी प्रभाव पड़ता है तो अर्जुनारिष्ट विशेष रूप से उपयोगी है। यह हृदय और फेफड़ों दोनों को मजबूत बनाता है। अर्जुनारिष्ट श्वसन क्षमता को बढ़ाता है और सांस की तकलीफ को कम करता है।

क्षय रोग में (Arjunarishta for tuberculosis)

क्षय रोग या टीबी में जब हृदय कमजोर हो जाता है तो अर्जुनारिष्ट बहुत लाभकारी है। यह शरीर को शक्ति प्रदान करता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। अर्जुनारिष्ट फेफड़ों को मजबूत बनाता है।

बुखार में (Arjunarishta for fever)

लंबे समय के बुखार के बाद होने वाली कमजोरी में अर्जुनारिष्ट उपयोगी है। यह शरीर को शक्ति देता है और जल्दी रिकवरी में मदद करता है। अर्जुनारिष्ट ज्वर के कारण कमजोर हुए हृदय को मजबूत बनाता है।

यकृत रोग में (Arjunarishta for liver diseases)

अर्जुनारिष्ट लीवर की कार्यक्षमता को बढ़ाता है और लीवर विकारों में सहायक हो सकता है। यह लीवर को डिटॉक्सिफाई करने में मदद करता है और लीवर की कोशिकाओं को पोषण देता है।

प्लीहा रोग में (Arjunarishta for spleen disorders)

तिल्ली या प्लीहा के बढ़ने और अन्य विकारों में अर्जुनारिष्ट लाभदायक है। यह प्लीहा के आकार को नियंत्रित करता है और उसकी कार्यप्रणाली में सुधार लाता है।

पाचन में (Arjunarishta for digestion)

अर्जुनारिष्ट पाचन अग्नि को बढ़ाता है और पाचन क्रिया को सुधारता है। यह भूख को बढ़ाता है और भोजन के पोषक तत्वों को अच्छे से अवशोषित करने में मदद करता है।

कमजोरी में (Arjunarishta for weakness)

शारीरिक कमजोरी, थकान और दुर्बलता में अर्जुनारिष्ट बहुत प्रभावी है। यह शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है और स्टैमिना बढ़ाता है। लंबी बीमारी के बाद की कमजोरी में अर्जुनारिष्ट रामबाण की तरह काम करता है।

सूजन में (Arjunarishta for inflammation)

शरीर में किसी भी प्रकार की सूजन को कम करने में अर्जुनारिष्ट सहायक है। यह शोथहर गुणों से भरपूर है और सूजन को दूर करता है।

घाव में (Arjunarishta for wounds)

घाव को जल्दी भरने में अर्जुनारिष्ट उपयोगी है। इसके नियमित सेवन से घाव जल्दी ठीक होते हैं और संक्रमण का खतरा कम होता है। आंतरिक घावों में भी यह लाभकारी है।

त्वचा रोग में (Arjunarishta for skin diseases)

अर्जुनारिष्ट रक्त को शुद्ध करके त्वचा रोगों में लाभ पहुंचाता है। यह त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाता है। मुंहासे, दाग-धब्बे और अन्य त्वचा समस्याओं में यह उपयोगी है।

मधुमेह में (Arjunarishta for diabetes)

मधुमेह के रोगियों में जो हृदय संबंधी समस्याएं होती हैं, उनमें अर्जुनारिष्ट विशेष रूप से लाभकारी है। यह रक्त शर्करा को भी कुछ हद तक नियंत्रित करने में मदद करता है।

मोटापा में (Arjunarishta for obesity)

मोटापे के कारण हृदय पर पड़ने वाले दबाव को अर्जुनारिष्ट कम करता है। यह मेटाबोलिज्म को सुधारता है और वजन नियंत्रण में सहायक हो सकता है।

मूत्र रोग में (Arjunarishta for urinary disorders)

मूत्र मार्ग के विकारों में अर्जुनारिष्ट कुछ हद तक लाभकारी हो सकता है। यह मूत्र प्रणाली को स्वस्थ रखने में मदद करता है।

महिला रोग में (Arjunarishta for women’s health)

महिलाओं में रक्तस्राव संबंधी समस्याओं और हृदय की कमजोरी में अर्जुनारिष्ट लाभदायक है। यह शरीर को शक्ति देता है और स्वास्थ्य में सुधार लाता है।

मुख्य घटक (Key Ingredients)

अर्जुन छाल – हृदय को मजबूत बनाता है और हृदय की कार्यक्षमता बढ़ाता है।

धातकी – किण्वन में सहायक और औषधि को प्रभावी बनाता है।

द्राक्षा – शक्ति प्रदान करता है और रक्त को पोषण देता है।

आमलकी – विटामिन सी से भरपूर, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।

सेवन मात्रा (Dosages of Arjunarishta)

वयस्कों के लिए:

  • मात्रा: 15-30 मिली (3-6 चम्मच)
  • दिन में दो बार (सुबह और रात)
  • भोजन के बाद

बच्चों के लिए (5-12 वर्ष):

  • मात्रा: 5-10 मिली (1-2 चम्मच)
  • दिन में दो बार
  • भोजन के बाद

किशोरों के लिए (12-18 वर्ष):

  • मात्रा: 10-15 मिली (2-3 चम्मच)
  • दिन में दो बार
  • भोजन के बाद

सेवन विधि (Method of consumption)

अर्जुनारिष्ट को बराबर मात्रा में गुनगुने पानी के साथ मिलाकर लेना चाहिए। इसे भोजन के तुरंत बाद लेना सबसे अच्छा होता है।

उदाहरण: यदि आप 15 मिली अर्जुनारिष्ट ले रहे हैं तो इसे 15 मिली गुनगुने पानी के साथ मिलाकर पिएं।

सावधानियां (Precautions of Arjunarishta)

  • गर्भवती महिलाओं को चिकित्सक की सलाह से ही लेना चाहिए।
  • स्तनपान कराने वाली माताओं को सावधानी से लें।
  • मधुमेह के रोगियों को इसमें शक्कर होने के कारण सावधानी से लेना चाहिए।
  • हृदय की दवाइयां ले रहे हैं तो चिकित्सक से परामर्श लें।
  • निम्न रक्तचाप वाले व्यक्तियों को सावधानी से लें।
  • इसमें अल्कोहल (5-10%) होता है, इसलिए वाहन चलाने से पहले सावधानी बरतें।
  • बच्चों को चिकित्सक की देखरेख में ही दें।
  • बताई गई मात्रा से अधिक सेवन न करें।
  • ठंडी और सूखी जगह पर रखें, सीधी धूप से बचाएं।
  • बोतल खोलने के बाद 6 महीने के अंदर उपयोग करें।
  • यदि किसी घटक से एलर्जी हो तो सेवन न करें।
  • शल्य क्रिया से पहले चिकित्सक को अवश्य बताएं।

महत्वपूर्ण सूचना:

यह जानकारी केवल शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। अर्जुनारिष्ट एक शक्तिशाली हृदय औषधि है। हृदय रोग में इसका सेवन योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की देखरेख में ही करें। यह आधुनिक हृदय उपचार का विकल्प नहीं बल्कि पूरक है। गंभीर हृदय रोग में तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।

घरेलू उपयोग के सुझाव:

हृदय को मजबूत बनाने के लिए: अर्जुनारिष्ट 15-30 मिली + बराबर पानी, भोजन के बाद दिन में दो बार नियमित रूप से लें।

रक्तचाप नियंत्रण के लिए: अर्जुनारिष्ट का नियमित सेवन करें और नमक कम खाएं, तनाव से बचें।

कमजोरी में: अर्जुनारिष्ट को दूध के साथ मिलाकर लेने से अधिक शक्ति मिलती है।

References:

PubMed — https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/?term=Arjunarishta

AYUSH Research Portal (Ministry of AYUSH, India) — https://ayushportal.nic.in/

Indian Journal of Traditional Knowledge — http://nopr.niscair.res.in/

National Medicinal Plants Board, India — http://www.nmpb.nic.in/

1mg – Arjunarishta Uses & Benefits — https://www.1mg.com/ayurveda/arjunarishta-270?srsltid=AfmBOooxIAYg9ul_vMd2fkHctFhvoMfi98Rcrk02rE1a7SQlYJOeNE6O

Apollo247 – Arjunarishta Benefits, Side Effects — https://www.apollo247.com/health-topics/general-medical-consultation/arjunarishta-uses-benefits-side-effects