रागी (Ragi): Finger Millet(Introduction, Benefits and Usages)
रागी का परिचय: (Introduction of Finger Millet)
रागी क्या है? (What is Finger Millet ?)
वैसे तो अनाज कई तरह के होते हैं और उनमें मुख्य रूप से ज्वार, बाजरा, गेहूं, मक्का आदि शामिल होते हैं| इसी प्रकार एक अनाज रागी या मंडुआ भी होता है| यह अनाज हमारी सेहत के लिए बहुत अधिक फायदेमंद होता है| इसमें ऐसे कई पोषक तत्व होते हैं जो अनेक रोगों से हमारा बचाव करते हैं| सर्दियों में मुख्य रूप से रागी के अनाज का सेवन किया जाता है| इस अनाज से रोटियां, हलवा, उपमा, बिस्कुट, डोसा, चिप्स आदि चीजें बनाई जा सकती है|
परंतु बहुत कम लोग यह जानते हैं कि इसका सेवन करने से कई सारे रोगों में भी निजात मिल सकती है| आयुर्वेद में काफी पुराने समय से इसका प्रयोग रोगों का शमन करने के लिए किया जाता है| तो आज हम विस्तार से बात करेंगे रागी और उससे मिलने वाले ढेर सारे फायदों के बारे में|
रागी में मिलने वाले पोषक तत्व (Nutrients of Finger Millet)
- वसा
- कार्बोहाइड्रेट
- खनिज
- कैल्शियम
- फास्फोरस
- आयरन
- विटामिन ए, बी
- आयरन
- प्रोटीन
बाह्य स्वरुप (आकृति विज्ञान) (Morphology of Finger Millet)
इसका पौधा लगभग 1 मीटर तक ऊंचा हो सकता है| इसका तना शाखित होता है| इसके पत्ते चौड़े होते हैं जो लगभग 7 mm व्यास के होते हैं| इसके फल चपटे, गोल और झुर्रीदार होते हैं| बीजों का रंग गहरा भूरा होता है| इसके बीच चिकने होते हैं और कभी-कभी झुर्रीदार भी हो सकते हैं| इसमें फल और फूल अगस्त से नवंबर के मध्य आते हैं|

रागी के सामान्य नाम (Finger Millet common names)
वानस्पतिक नाम (Botanical Name) | Eleusine coracana |
अंग्रेजी (English) | Coracan millet, Indian millet, Poko grass, Finger millet |
हिंदी (Hindi) | मंडुआ, रागी, मकरा, मंडल, रोत्का |
संस्कृत (Sanskrit) | मधूलिका, नर्तक, नृत्यकुण्डल, बहुपत्रक, भूचरा, कठिन, कणिश |
अन्य (Other) | मांडिया (उड़िया) गोन्ड्डो (कोंकणी) पागली (गुजराती) केलवारागू (तमिल) |
कुल (Family) | Poaceae |

रागी के आयुर्वेदिक गुण धर्म (Ayurvedic Properties of Finger Millet)
दोष (Dosha) | |
रस (Taste) | |
गुण (Qualities) | |
वीर्य (Potency) | |
विपाक(Post Digestion Effect) | |
अन्य (Others) |
रागी के औषधीय फायदे एवं उपयोग (Benefits and Usages of Finger Millet)
हड्डियों को मजबूती दे रागी का सेवन (Finger Millet for bones)
- रागी में भरपूर मात्रा में कैल्शियम पाया जाता है| यदि इस आटे से बने खाद्य पदार्थों का सेवन नियमित रूप से किया जाता है तो इसके चलते कमजोर हड्डियां या हड्डियों से जुड़ी हुई किसी भी समस्या को आसानी से हल किया जा सकता है| कैल्शियम हमारी हड्डियों के लिए बहुत अच्छा होता है|
बल की वृद्धि करें (Finger Millet for strength)
- यदि आप शारीरिक रूप से पतले दुबले हैं तथा बल का अभाव है तो इस स्थिति में आपको रागी के आटे का सेवन करना चाहिए| इसका सेवन करने से आपके शरीर को बल मिलेगा तथा शरीर हष्ट पुष्ट होगा|
अस्थमा और खांसी का शमन करें (Finger Millet for asthma and cough)
- रागी आदि द्रव्यों से सिद्ध किया हुआ घी का यदि उचित मात्रा में सेवन किया जाता है तो इससे अस्थमा खांसी के साथ-साथ हिक्का की समस्या में भी लाभ लिया जा सकता है|
- इसके अतिरिक्त रागी, हाउबेर, नीलकमल, महुआ इन सब के चूर्ण को घी और शहद के साथ लेने से हिक्का, अस्थमा के साथ-साथ रक्तपित्त और उल्टी जैसी समस्या का भी समापन होता है|

मोटापा कम करें (Finger Millet for obesity)
- यदि आप का वजन अधिक है और आप उसे नियंत्रण में लाने की कोशिश कर रहे हैं तो आपको बता दें कि रागी उसके लिए एक अच्छा उपाय हो सकता है| यह अन्य अनाज की तुलना में आपके वजन को जल्दी नियंत्रित करने में मदद करता हैं|
कब्ज को दूर करें (Ragi for constipation)
- रागी के बीजों में सैलूलोज की मात्रा काफी पाई जाती है जिसके कारण कब्ज को दूर किया जा सकता है| यदि आप इसका नियमित सेवन करते हैं तो कब्ज़ में इसके अच्छे उपयोग देखे जा सकते हैं|
कुष्ठ में लाभदायक (Finger Millet for leprosy)
- कुष्ठ या त्वचा संबंधी समस्याएं होने पर यदि रागी को सफेद चित्रक के साथ मिला कर लिया जाता है तो इससे कुष्ठ में लाभ मिलता है|
मधुमेह को समाप्त करने में मदद करें (Finger Millet for diabetes)
- रागी का आटा मधुमेह को नियंत्रित करने में बहुत अधिक सहायता करता है| गेहूं के स्थान पर इसका सेवन करना चाहिए क्योंकि गेहूं में कुछ मात्रा में शर्करा या शुगर होती है जिससे मधुमेह का खतरा और बढ़ सकता है | लेकिन रागी का आटा शुगर फ्री होता है जो आपके मधुमेह को नियंत्रित कर पाने में सक्षम होता है|
दस्त को बंद करें (Finger Millet for diarrhea)
- मधुलिका का प्रयोग आप दस्त को बंद करने के लिए भी कर सकते हैं| रागी से बने हलवे या रोटी का सेवन इसके लिए उपयुक्त रहता है|
खून की कमी दूर करें (Finger Millet for anemia)
- रागी में आयरन पाया जाता है इसके कारण यदि आप रागी के आटे का सेवन नियमित रूप से करते हैं तो इससे आपकी खून में बढ़ोतरी होती है| इसके साथ ही यदि आप हरी और पत्तेदार सब्जियों का सेवन भी करते हैं तो इससे आपको जल्द ही अच्छे परिणाम मिलने शुरू होते हैं|
पित्त के कारण होने वाले जुकाम में लाभदायक (Finger Millet for cold)
- गूगल, राल, पतंग, प्रियंगु, शहद, चीनी, मुनक्का, रागी और मूलेठी इन सभी द्रव्य से बने हुए काढ़े से यदि गरारे किये जाते है तो जुखाम का शमन किया जा सकता है|
मुखमंडीका रोग
मधुलिका, तुगाक्षीरी, दूध, लघु पंचमूल और काकोल्यादी गण के कल्क तथा काढ़े में भी सिद्ध करके उपयोग में लेने से बच्चों में होने वाला मुखमंडीका रोग समाप्त होता है|
उपयोगी अंग (भाग) (Important parts of Finger Millet)
- बीज
सेवन मात्रा (Dosage of Finger Millet)
- क्वाथ – 10-20 ml