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धतूरा (Dhatura)

धतूरा का परिचय: (Introduction of Dhatura)

Table of Contents

 धतूरा क्या है? (Dhatura kya hai?)

आप इस धतूरा को जानते होंगे| शिव को चढ़ाया जाने वाला कांटेदार फल धतूरा आम तौर पर ज़हरीला और जंगली फल माना जाता है और यही कारण है कि पूजन के अलावा इसका प्रयोग किसी भी काम में नहीं किया जाता| लेकिन धतूरे के इन फायदों को जानने के बाद यह फल आपकी भी पसंद बन जाएगा|

क्या आपको पता है कि जो धतूरा जहरीला होता है उसको आयुर्वेद में एक रामबाण औषधि माना है| यह कई सारी बिमारियों को नष्ट करता है| यह सबसे अधिक बालो के लिए उपयोग में आता है| आयुर्वेद में एक जड़ी बूटी है जिसके जहरीली होने पर भी इसका उपयोग किया जाता है साथ ही इसमे कुछ ऐसे पौषक तत्व पाए जाता है जो आपके शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद है |

आयुर्वेद के अनुसार दिमाग की पीड़ा, सिर कि जुंए, बवासीर की समस्या, आँखों में दर्द, बुखार, गठिया पीनस आदि ऐसे रोग है जिनमे इसका  उपयोग करने पर छुटकारा मिलता है| चलिए इसके अन्य फायदों के बारे में विस्तार से परिचित करवाते है की धतूरा किन – किन बिमारियों में उपचार के लिए प्रयोग किया जाता है|  

बाह्य स्वरुप (आकृति विज्ञान) ( dhtura ki akriti)

यह पूरे भारत में पाया जाता है| कृष्ण धतूरा कही –कही पाया जाता है| धतूरे की अन्य प्रजातियों में यह अधिक बल शाली होता है| फूलो के आधार पर इसे पांच भागो में बाटा गया है| यह सफ़ेद, लाल नीला, तथा कृष्ण व पीत रंग के होते है|

यह सीधा 1 से 2 मीटर ऊँचा व लचीला झाड़ीदार तथा शाखाओ वाला पौधा होता है| इसका तना सीधा व गोलकर शाखाओं से युक्त होता है| इसकी शाखाये टेडी –मेडी व हरी तथा हल्के लाल रंग व बैंगनी रंग की होती है| इसके पत्ते सरल तथा चिकने और पाली के आकार समान होते है| इसके फूल सीधे तथा घंटी के आकार जैसा बैंगनी रंग तथा सफेद रंग व पांच भागो में विभक्त होते है| इसके फल लचीले व गोलाकार तथा अंडाकार नुकीले काटेदार होते है| इसके बीज चिकने भूरे रंग के तथा चपटे व मोटे बदबूदार, खुरदरे तथा स्वाद में कडवे होते है| इसका फूलकाल व फल काल जुलाई से फरवरी तक होता है| धतूरे का उपयोग चिकित्सक के अनुरूप ही करना चहिए|

Dhatura fruits Herbal Arcade
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धतूरा की प्रजातियाँ (dhtura ki prajatiya)

  • क्षुद्र धतूरा  
धतूरा के सामान्य नाम Herbal Arcade
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धतूरा के सामान्य नाम (Dhatura common names)

वानस्पतिक नाम (Botanical Name)Datura metel
अंग्रेजी (English)Thorn apple
हिंदी (Hindi)धतूरा,
संस्कृत (Sanskrit)धूर्त्, धुस्तुरा
अन्य (Other)धोतुरा ( उड़िया) बिलियुम्मटा (कन्नड़) केलोधतुर ( गुजराती) तेला उम्मेत (तमिल ) धतूरा (बंगाली ) कोला (पंजाबी) धोत्रा (मराठी) केरियमट्टा (मलयालम)  
कुल (Family)Solanaceae

धतूरा के आयुर्वेदिक गुण धर्म (Dhatura ke Ayurvedic gun)

दोष (Dosha) कफवातशामक (pacifies cough and vata)
रस (Taste) तिक्त (bitter), कटु (pungent)
गुण (Qualities) लघु (light), रुक्ष (dry)
वीर्य (Potency) उष्ण (hot)
विपाक(Post Digestion Effect) कटु (pungent)
अन्य (Others) मादक, वेदनास्थापन, त्वगदोषहर, उत्तेजक
Ayurvedic properties of dhatura Herbal Arcade
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धूर्त्/धतूरा के औषधीय फायदे एवं उपयोग (Dhatura ke fayde or upyog)

मस्तिष्क की पीड़ा में (Dhatura for mind)

  • यदि आपके माथे के उपर दर्द होता है तो आपको धतूरा का उपयोग करना चहिए| धतूरे के बीज को बिना चबाये निगलने से पुराने से पुराने माथे के दर्द के छुटकारा मिलता है|

गठिया से दूर और हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए धतूरे का प्रयोग (Dhatura for gout and bones)

  • हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए भी धतूरे का उपयोग किया जाता है| धतूरे में कैल्शियम की अच्छी मात्रा पाई जाती है| इसका रस निकालकर हड्डियों के जोड़ पर मालिश करने से  हड्डियों को मजबूती मिलती है और इसके साथ ही गठिया के दर्द से भी छुटकारा मिलता है|

चोट की सूजन में (Dhatura for swelling of injury)

  •  यदि आपको कहीं पर चोट लग गई और सूजन आ गई तो इसके लिए धतूरे का प्रयोग कर सकते है, क्योकि धतूरे के फल में एंटीइन्फ्लेट्री गुण पाया जाता है| जिससे यह चोट के कारण से हुई सूजन को कम करता है| इसके फूलो का पेस्ट सूजन पर लगाने से सूजन दूर होती है| इसके साथ ही इसके पत्तो को स्तन पर बांधने से स्तन की सूजन से छुटकारा मिलता है|

बवासीर में  धतूरा का उपयोग (Dhatura for piles)

  • अगर बवासीर के परेशान हैं तो ये इसके इलाज में भी कारगर है| धतूरे के पत्ते और फूलों को जलाकर इसके धुएं से बवासीर के मस्सों की सिकाई की जाती है|

सिर की जूंए मिटाने के लिए

  • यदि आपके सिर में जूंए हो गई है तो सरसों के तैल, धतूरे के पत्तो का रस और पत्तो का घोल मिलाकर धीमी आच पर पकाकर, जब तैल आधा रह जाये, उसे ठंडा होने पर सिर पर लगाने से सिर की जूंए नष्ट होती है|   

सिर के गंजेपन में (Dhatura for hair fall)

  • धतूरे के पत्तो का रस तथा पारद मिलाकर लेप करने से तथा पत्तो के रस का घोल बनाकर उसमे तैल डाल कर सिर में मालिश करने से बालो का झड़ना बंद होता है और गंजेपन की समस्या दूर होती है|

आँखों के दर्द में (Dhatura for eyes)

  • यदि आपकी आँख दर्द कर रही है तो आपको धतूरे के पत्ते के रस को आँखों के  बाहर चारो तरफ लगाने से आँख दर्द होना बंद हो जाती है|

कान दर्द में (Dhatura for ear)

  • यदि आपका कान दर्द कर रहा और सूजन भी है तो आपको धतूरे के पत्ते  रस को पकाकर जहां सूजन है और दर्द है वहां पर लेप करने से दर्द का शमन होता है|

सांस में (Dhatura for asthma)

  • धतूरे के फल, टहनिया तथा पत्तो को कूटकर सुखाकर चूर्ण बना ले, फिर इस चूर्ण का धुम्रपान करने से सांस के रोग समाप्त होते है, और इसके साथ ही दमे का दौरा नही पड़ता है|

हैजा में

  • यदि आप इस रोग से पीडीत है तो धतूरे के फूल को केसर के बतासे में रख कर सीमित मात्रा में सेवन करने से हैजा की समस्या समाप्त होती है|

कामशक्ति  को बढ़ाने के लिए धतूरा

  • यदि किसी व्यक्ति की कामशक्ति कमजोर है तो धतूरे के बीज, अकरकरा और लौंग इन तीनो को मिलाने छोटी – छोटी गोलिया बनाकर खाने से कामशक्ति बढती है|

हाथ पैरो के फटना

  • यदि आपके किसी कारण हाथ पैर फटरहे हो तो धतूरे के बीज तथा सरसों के तैल को पकाकर हाथ – पैरो पर नियमित रूप से  लगाने से फटने की समस्या दूर होती है|

नारू रोग में धतूरा

  • इस रोग से परेशान होने वाले व्याक्तियों के लिए धतूरा बहुत ही उपयोगी है इसके लिए धतूरे के पत्ते की पुटली बनाकर बांधने  से इस रोग से छुटकारा मिलता है|

घाव में (Dhatura for wound)

  • यदि घाव से पिप निकल रहा हो या छिछडे जम गये हो तो इस घाव को पानी से धो कर फिर धतूरे के पत्तो को बाँधने से घाव जल्दी भरता है|

पागलपन में धतूरा

  • यदि किसी व्यक्ति का मानसिक संतुलन खराब है या वह पागलपन जैसा व्यवहार करता है तो उसको काले धतूरे के शुद्ध बीज को पित्त – पापड़ा के रस में मिलाकर पिलाने से पागलपन की समस्या दूर होती है|

बुखार में (Dhatura for fever)

  • बुखार या कफ होने की स्थिति में लगभग 120 मिग्रा  काले धतूरे के बीज लेकर इसे जलाकर राख बना लें और इस राख को व्यक्ति को देने से  बुखार या कफ गायब हो जाएगा| इसका उपयोग दिन में दो बार ही करे|

बिच्छू के काटने पर धतूरा

  • कहते है कि जहर जहर को ही कटता है, इसलिए बिच्छु के काटे जाने पर धतूरे का उपयोग किया जाता है| इसके लिए धतूरे के पत्तो को पीसकर प्रभावित स्थान पर लगाने से दर्द और सूजन का शमन होता है|

उपयोगी अंग (भाग) (Important parts of Dhatura)

  • जड़
  • पत्ती
  • बीज
  • पंचांग
  • फुल

सेवन मात्रा (Dosages of Dhatura)

  • चिकित्सक के अनुसार

सावधानियां- (Precautions of Dhatura)

  • इसके बीज जहरीले होते है इसका सेवन करने से पागलपन का दौरा पड़ता है| अतः इसका सेवन करने के पहले धतूरे के बीजो को पटली में 4 घंटे  रखकर फिर निकलकर गर्म पानी के साथ धोने से यह साफ़ हो जाते है|

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