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वासा (Vasa)

वासा (अडूसा) का परिचय: (Introduction of Vasa)

Table of Contents

वासा क्या है? (What is Vasa)

इसके बारे में तो सब ही जानते होंगे| इसका उपयोग बचपन में हमारी दादी और नानी सर्दी जुकाम के उपचार में करती होगी|  यह वासा मनुष्य के लिए बहुत ही उपयोगी औषधि है| इसके प्रयोग से कही सारी बीमारियों पर रोग लगा सकते है|

इसका प्रयोग केवल सर्दी जुकाम में ही नही किया जाता है बल्कि यह आँखों के रोग, पथरी, कुष्ठ रोग, ग्रहणी, योनि के रोग, गुल्म  आदि रोगो के लिए बहुत ही उपयोगी है| आयुर्वेद में इसे एक महत्वपूर्ण औषधि माना है जो रोगो के लिए रामबाण की तरह काम करती है|

इसे वासिका (जो सघन होने के कारण प्रदेश को आच्छादित कर ले), सिंहास्य (सिंह मुख के समान पुष्प वाला), वाजिदन्ता (घोड़े के दांतों के समान फूल वाला) आदि नामों से भी जाना जाता है| इसके फायदे यही पर ही खत्म नही होते है| इसमे औषधि गुण होने के कारण इसके बहुत सारे फायदे है| आइये जानते है की इस वासा को किन किन बीमारियों में प्रयोग किया जाता है|

बाह्य स्वरुप (आकृति विज्ञान) (Vasa ki akriti)

वासा का पौधा कंकरीली भूमि पर अपने आप ही उग जाता है|  इसके पत्ते का शाक कफ तथा पित्त विकार कम करता है| इसकी तीन प्रजातियाँ पाई जाती है, जो निम्न है|

श्वेत वासा ( Adhatada zeylanica Medik. )

  • इसका पौधा झाड़ीनुमा होता है| इसके पत्ते लम्बे, रोमश, विपरीत दिशा में फैले हुए, और हरे रंग के तथा नोकदार होते है| इसके फूल सफेद तथा मंजरी में लगे हुए होते है| इसकी मंजरिया फरवरी से मार्च में आते है| इसकी फली लम्बी चौड़ी होती है और प्रत्येक फली में चार बीज होते है|

रक्त वासा (raptophyllum pictum (Linn.) Grjiff. ग्रैप्टोफायलम् पिक्टम् (Syn- Graptophyllum hortense Nees, Justicia pictaLinn.)

  • इसके पत्ते लम्बे चौड़े दोनों ओरसंकुचित होते है इसके फूल गेहरे लाल रंग के होते है| 
  • इसकी पत्तियाँ मृदुकारी तथा सूजन कम करने में मदद करता है।
  • यह ग्राम धनात्मक एवं ग्राम ऋणात्मक जीवाणुओं के प्रति सूक्ष्मजीवीनाशक क्रियाशीलता प्रदर्शित करता है| यह एंटीकोलीनेस्टेरेज क्रियाशीलता प्रदर्शित करता है|

कृष्ण वासा (Gendarussa vulgaris Nees. (जेन्डारुसा वल्गैरिस)  Syn-Justicia gendarussa Burm.

  • इसके पत्ते विपरीत दिशा में फैले हुए चौड़े, रेखाकार तथा भालाकर होते है|   इस पौधे का पूरा भाग बैंगनी रंग का होता है| कई स्थानों पर इसका प्रयोग कटसरैया में मिलावट के लिए किया जाता है|
  • काला वासा रस में कड़वा, तीखा तथा गर्म, उल्टी व रेचक होता है एवं बुखार, बलगम बीमारी से राहत दिलाने तथा अर्दित आदि रोगों में लाभकारी होता है|
  • ऊपर वर्णित वासा की प्रजातियों के अतिरिक्त निम्नलिखित प्रजाति का प्रयोग भी चिकित्सा में किया जाता है।

Adhatoda  beddomei B.Clarke (क्षुद्रवासा) –  

  • यह लगभग 3-4 मीटर तक ऊँचा शाखा-प्रशाखायुक्त पौधा झाड़ीदार  होता है| फूल सफेद रंग के होते हैं| कई जगहों पर वासा के स्थान पर इसका प्रयोग किया जाता है| इसके पत्ते, जड़ तथा फूल का प्रयोग चिकित्सा के लिए किया जाता है| इसके पत्ते उल्टी के लिए तथा रक्त रोधी  होते है| इसका पौधा कफ कारण होने वाला तथा बलकारक होता है| फूलों का प्रयोग आँखों की बीमारियों की चिकित्सा में किया जाता है|

बंगाल में कृष्ण वासा तथा केरल में क्षुद्र वासा प्रचलित है जिसे सामान्य वासा से अधिक गुणकारी माना जाता है|

वासा के औषधीय गुण

  • अडूसा  वातकारक, कफपित्त कम करने वाला,  स्वर के लिए उत्तम,  हृदय की बीमारी, रक्त संबंधी बीमारी, प्यास, सांस संबंधी, खांसी,बुखार, उल्टी, प्रमेह, तथा टी. बी. के रोग में लाभदायक है| यह सांस की बीमारी पर इसकी मुख्य क्रिया होती है| यह कफ को पतला कर बाहर निकालता है तथा सांस नलिकाओं का कम, परन्तु स्थायी प्रसार करता है| सांस नलिकाओं के फैल जाने से दमे के रोगी का सांस फूलना कम हो जाता है|
  • यदि कफ के साथ यदि खून भी आता हो तो वह भी बंद हो जाता है| इस प्रकार यह खांसी को हरने वाल होता है| यह खून शोधक एवं रक्तस्तम्भक है, क्योंकि यह छोटी रक्तवाहनियों को संकुचित करता है| यह प्राणदानाड़ी को अवसादित कर खून के भार को कुछ कम करता है| इसकी पत्त्तियां सूजन कम करने वाला, दर्द कम करने वाला, जन्तु को काटने पर तथा कुष्ठ से राहत दिलाने में मदद करता है| यह मूत्र जनन,  स्वेदजनन है| नवीन कफ रोगों की अपेक्षा इसका प्रयोग पूराने कफ रोगों में अधिक लाभकारी होता है|

वासा  की प्रजातियाँ (Vasa ki prajatiya)

1. Adhatada zeylanica Medik. 

2. raptophyllum pictum 

3. Gendarussa vulgaris Nees

4. Adhatoda  beddomei B.Clarke 

वासा के सामान्य नाम Herbal Arcade
वासा के सामान्य नाम Herbal Arcade

वासा के सामान्य नाम (Vasa common names)

वानस्पतिक नाम (Botanical Name)Adhatada zeylanica
अंग्रेजी (English)Malabar nut
हिंदी (Hindi)अडूसा, अडुस्, अरुस, बाकस, बिर्सोटा, रूसा, अरुशा;
संस्कृत (Sanskrit)वासक, वासिका, वासा, सिंहास्य, भिषङ्माता, सिंहिका, वाजिदन्ता, आटरूषक, अटरूष, वृष, ताम्र, सिंहपर्ण,
अन्य (Other)अरूसा (उर्दू) बासोंगो  (उड़िया) वासिग(उतराखण्ड) अडोलसो (कोंकणी) आडुसोगे (कन्नड़) अरडुसो (गुजराती) एढाटोडी  (तमिल) आड्डा सारामू (तेलगु) वासक (बंगाली) असुरू (नेपाली) भेकर  (पंजाबी) अडुलसा  (मराठी) आटडालोटकम् (मलयालम)
कुल (Family)Acanthaceae

वासा के आयुर्वेदिक गुण धर्म (Vasa ke Ayurvedic gun)

दोष (Dosha)कफपित्त शामक (pacifies cough and pitta)
रस (Taste)तिक्त (bitter), कषाय (astringent)
गुण (Qualities) रुक्ष (dry), लघु (light)
वीर्य (Potency) शीत (cold)
विपाक(Post Digestion Effect) कटु (pungent)
अन्य (Others) शोथहर, जंतुघ्न, रक्तशोधक एंव स्तम्भन
Ayurvedic properties of Vasa
Ayurvedic properties of Vasa

वासा के औषधीय फायदे एवं उपयोग (Vasa ke fayde or upyog)

सर्दी जुकाम में को दूर करने के लिए (Vasa for cough and cold)

  • यह औषधि सर्दी जुकाम के लिए एक लाजवाब औषधि है| अगर आपको मौसम बदला ही नही के जुकाम की समस्या हो जाती है| तो इस परेशानी से छुटकारा पाने के लिए इसके पत्ते का प्रयोग कर सकते है|

कफ के विकार में (Vasa for cough)

  • अगर सर्दी या किसी बीमारी के कारण आपको बार- बार कफ या बलगम भरी खांसी होने लगती है तो वासा का प्रयोग राहत दिलाने में मदद करेगा| इसके लिए हरड़, बहेड़ा, आँवला, पटोल पत्ता, वासा, गिलोय, कुटकी तथा पिप्पली की जड़ को मिलाकर काढ़ा बनाकर के काढ़े में मधु डालकर सेवन करने से कफ संबंधित बुखार में लाभ होता है| इसके अलावा अडूसा, पीपरामूल, कुटकी, नेत्रबाला तथा धमासा का काढ़ा बनाकर काढ़े में सोंठ चूर्ण डालकर पीने से भी कफ के बुखार में लाभ होता है|

अस्थमा में (Vasa for asthma)

  • हर बार मौसम बदलने के समय अगर आप दमे से परेशान रहते हैं तो अडूसा का सेवन करें| इसके ताजे पत्तों को सुखाकर, उनमें थोड़े से काले धतूरे के सूखे हुए पत्ते मिलाकर दोनों को पीसकर चूर्ण बनाकर धूम्रपान करने से सांस लेने की तकलीफ में लाभ होता है|

मधुमेह में (Vasa for diabetes)

  • यदि आप इस परेशानी से ग्रस्त है तो छुटकारा पाने के लिए इसकी जड़ का चूर्ण बनाकर सेवन करने से डायबिटीज में लाभ होता है|

लीवर को स्वस्थ रखने के लिए (Vasa for liver)

  • लीवर हमारे शरीर का एक अहम अंग है| यदि यह ख़राब हो जाता है तो हमे बीमारियों का सामना करना पड़ता है| इसलिए इसे स्वस्थ रखने के लिए वासा का प्रयोग किया जाता है|

शरीर की बदबू दूर करने के लिए वासा का उपयोग

  • चाहे वह गर्मी का मौसम हो या सर्दी का किसी किसी के शरीर से बहुत बदबू आती है , लेकिन वासा का प्रयोग बहुत फायदेमंद साबित होता है| वासा के पत्ते के रस में थोड़ा शंख का चूर्ण मिलाकर लगाने से शरीर की दुर्गन्ध दूर हो जाती है|

ह्रदय की बीमारी को दूर करे (Vasa for heart)

  • यदि आप ह्रदय की किसी भी बीमारी से पीड़ित है तो वासा का उपयोग ह्रदय के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है| इसके लिए इसकी पत्तियों का उपयोग ह्रदय के लिए अच्छा होता है|

टी. बी. के रोग को दूर करने के लिए (Vasa for T.B.)

  • टी.बी की बीमारी की बीमारी में वासा का उपयोग फायदेमंद होता है| यदि कोई इस रोग से पीड़ित है तो अडूसा के पत्तों के काढ़े में छोटी पीपल का चूर्ण मिलाकर पिने से खांसी, सांस संबंधी समस्या और टी.बी. रोग में लाभ होता है|

पीलिया को दूर करने के लिए (Vasa for jaundice)

  • अगर आपको पीलिया हुआ है और आप इसके लक्षणों से परेशान हैं तो वासा का सेवन इस तरह से कर सकते हैं| वासा पंचांग के रस में मधु और मिश्री समान मात्रा में मिलाकर सेवन करने से पीलिया रोग ठीक हो जाता है|

दस्त में उपयोगी वासा (Vasa for diarrhea)

  • मसालेदार खाने से अगर आपको दस्त हो रहा और रुकने के नाम नहीं ले रहा तो वासा का उपयोग  जल्द आराम दिलाने में मदद करेगा| वासा पत्ते के रस को दिन में तीन चार बार पीने से दस्त में लाभ होता है|

दांत के दर्द में (Vasa for teeth)

  • बच्चे और लोगों सभी दांतों के कैविटी से परेशान रहते हैं इसके लिए वासा का प्रयोग करने से लाभ मिलेगा| दाढ़ या दांत में कैविटी हो जाने पर उस स्थान में वासा पत्ते का निचोड़ भर देने से आराम होता है|
  • इसके अलावा वासा के पत्तो का काढ़ा बनाकर गरारे करने पर दांत दर्द का शमन होता है|

बवासीर की परेशानी को दूर करने के लिए (Vasa for piles)

  • अगर ज्यादा मसालेदार, तीखा खाने के आदि है तो बवासीर की बीमारी होने की संभावना बढ़ जाती है| उसमें वासा का घरेलू उपाय बहुत ही फायदेमंद साबित होता है| अडूसा के पत्ते और सफेद चंदन इनको बराबर मात्रा में लेकर महीन चूर्ण बना ले| इस चूर्ण को प्रतिदिन, दिन में दो बार सुबह शाम सेवन करने से बवासीर में बहुत लाभ होता है| मस्सो में यदि सूजन हो तो वासा के पत्तों के काढ़े का बफारा देना चाहिए|

कीडनी की सूजन को दूर करने के लिए (Vasa for kidney)

  • यदि आपकी कीडनी में सूजन है तो अडूसा का औषधीय गुण किडनी के दर्द और सूजन से आराम दिलाने में बहुत फायदेमंद है| वासा और नीम के पत्तों को गर्म कर नाभि के निचले भाग पर सेंक करने से तथा अडूसे के पत्तों के रस में शहद मिलाकर पिने से गुर्दे के भयंकर दर्द में  लाभ होता है|

पेट में पानी भरने के समस्या का रोकने के लिए

  • पेट में पानी या प्रोटीन द्रव्य के ज्यादा हो जाने के कारण पेट फूल जाता है और दर्द होने लगता है| ऐसी परेशानी में वासा बहुत फायदेमंद होता है|  जलोदर में जब पूरा शरीर सफेद हो जाय तो इसमे वासा के पत्तों का रस दिन में पिने से लाभ होता है|

मुहं के छालों में (Vasa for mouth ulcers)

  • मुंह के छालों को ठीक करने में अडूसा काफी उपयोगी है क्योंकि अडूसा शीत और कषाय होता है| जिससे यह मुँह के छालों के लक्षणों को कम करने में मदद करता है| यदि आपके भी मुंह में छाले हो गये है तो वासा के पत्तो को चबाकर इस रस को चूसने से छालों में लाभ होता है|
  • इसके अलावा वासा के काढ़े में एक चम्मच गेरू और दो चम्मच मधु मिलाकर मुख में रखने से मुँह का घाव सूख जाता है|

सिर दर्द में (Vasa for headache)

  • आजकल के तनाव भरी जिंदगी में सिरदर्द आम समस्या हो गई है| सिरदर्द होने पर अडूसा का सेवन बहुत लाभकारी होता है| सिर दर्द से राहत पाने के लिए अडूसा के फूलो को  छाया में सूखे कर पीस ले| फिर फूल के चूर्ण में समान मात्रा में गुड़ मिलाकर खाने से सिरदर्द से आराम मिलता है|

आँख की सूजन को कम करे

  • अगर किसी बीमारी के कारण या दिन भर कंप्यूटर पर काम करने के वजह से आँखों में सूजन हुआ है तो वासा का औषधीय गुण बहुत काम आता है| वासा के ताजे फूलों को गर्म कर आंख पर बांधने से आंख की सूजन कम होती है|

मूत्र रोग में (Vasa for urinary disease)

  • मूत्र संबंधी बीमारी में बहुत तरह की समस्याएं आती हैं, जैसे  मूत्र करते समय दर्द या जलन होना, पेशाब  रुक रुक कर आना,  मूत्र कम होना आदि| वासा इस बीमारी में बहुत ही लाभकारी साबित होता है| इसके लिए खरबूजे के बीज तथा अडूसा के पत्तों को बराबर मात्रा में लेकर पीसकर पीने से पेशाब खुलकर आता है तथा इस रोग में लाभ होता है|
  • इसके अलावा वासा के फूलों को रात के समय एक गिलास जल में भिगोकर सुबह मसलकर छानकर पीने से दर्द  या मूत्र करते हुए जलन से आराम मिलता है|

बुखार में (Vasa for fever)

  • पैत्तिक ज्वर से राहत पाने के लिए वासा का पत्ता और आंवला बराबर लेकर कूट कर शाम के  समय मिट्टी के बर्तन में भिगो दें| सुबह पीसकर उसका रस निचोड़ लें, इसमें मिश्री मिलाकर पिलाने से बुखार कम होता है|

चेचक में वासा

  • यदि चेचक फैली हुई हो तो वासा के पत्तो तथा मुलेठी  इन दोनों का काढ़ा बनाकर बच्चों को पिलाने से चेचक का भय नहीं रहता है|

मिर्गी रोग में (Vasa for epilepsy)

  • प्रतिदिन जो रोगी दूध भात खाते हैं उसमें  वासा चूर्ण को एक चम्मच मधु के साथ सेवन करने से उसे पुराने भयंकर मिरगी रोग में अत्यन्त लाभ होता है|

नकसीर में (Vasa for blood bile)

  • यदि  मौसम बदलने के कारण आपके नाक कान से खून निकलता है तो अडूसा पत्ते के रस में तालीस पत्र का चूर्ण तथा मधु मिलाकर सुबह शाम पीने से कफ की बीमारी, पित्त विकार, दम फूलना, गले की खराश तथा नाक कान से खून आना बंद हो जाता है|
  • ताजे हरे अडूसा के पत्तों का रस निकालकर रस में मधु तथा खाँड मिलाकर सुबह शाम सेवन करने से भयंकर रक्तपित्त शांत हो जाता है|

फोड़ो फुंसी से राहत पाने के लिए वासा

  • फोड़ा अगर सूख नहीं रहा है तो वासा का इस तरह से प्रयोग करने पर जल्दी सूख जाता है| फोड़े पर प्रारंभ में ही इसके पत्तों को पानी के साथ पीसकर लेप कर तो फोड़ा बैठ जाता है|

मासिकधर्म की समस्या में उपयोगी वासा

  • महिलाओं में मासिक धर्म की समस्या बहुत ही आम है| लेकिन वासा का औषधीय गुण इस बीमारी से निजात दिलाने में बहुत काम आता है| इसके लिए वासा पत्ते में, मूली व गाजर के बीज को  पानी में पका लें|  इस काढ़े का कुछ दिन सेवन करने सेमासिकधर्म में होने वाली परेशानियों में लाभ  लाभ होता है|

सफेद पानी में वासा

  • महिलाओं को अक्सर योनि से सफेद पानी निकलने की समस्या होती है| सफेद पानी का स्राव अत्यधिक होने पर कमजोरी भी हो जाती है| इससे राहत पाने में वासा का सेवन फायदेमंद होता है| इसके लिए वासा के पत्ते के रस में मधु मिलाकर सुबह शाम सेवन करने से सफेद पानी में लाभ होता है|
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उपयोगी अंग (भाग) (Important parts of Vasa)

  • जड़
  • पत्ती
  • फूल

सेवन मात्रा (Dosages of Vasa)

  • पत्ते का जूस -10 से 15 मिली
  • जड़ का चूर्ण  -3 से 6 ग्राम

वासा से निर्मित औषधियां

  • वासावलेह
  • वासारिष्ट
  • वासापानक
  • वासाचंदनादि तेल

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