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अजवायन (Ommum)

अजवायन का परिचय: (Introduction of Ajwain)

Table of Contents

अजवायन क्या है? (What is Ajwain?)

शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति होगा जिसने अजवायन का नाम ना सुना हो| सभी भारतीय महिलाएं अजवायन का उपयोग भोजन को स्वादिष्ट बनाने के लिए किया करती हैं| लेकिन क्या आपको पता हैं अजवायन भोजन को ना सिर्फ स्वादिष्ट बनाता हैं बल्कि कई रोगों का भी शमन करता हैं|

यदि किसी व्यक्ति को दूध के पाचन में दिक्कत आती हो तो दूध पीने के बाद थोड़े से अजवायन का सेवन कर लेना चाहिए इससे दूध आसानी से पच जाता हैं| इसी तरह यहाँ हम बात करेंगे अजवायन के कई ऐसे फायदों और अजवायन के विभिन्न तरह से उपयोग के बारे में जिससे कोई भी व्यक्ति अपने जीवन को स्वस्थ बना सकता हैं|

अजवायन मिश्र, ईरान, अफगानिस्तान, राजस्थान, पंजाब, गुजरात आदि स्थानों पर बहुलता के साथ पाया जाता हैं|

अजवायन में पाए जाने वाले रासायनिक तत्व (Ajwain ke poshak tatva)

  • सुगन्धित और अवाष्पशील तेल
  • क्युमिन
  • कैम्फिन
  • डाइपेन्टिन
  • मिरसीन
  • फिनोल
  • लिनोलीक
  • ओलिक
  • पोमिटिक
  • निकोटिनिक अम्ल
  • राइबोफ्लेविन
  • पाईनीन
  • थायमीन
  • थाईमोल

बाह्य स्वरुप (आकृति विज्ञान) (Ajwain ki akriti)

इस का पौधा 40 से 80 cm तक लम्बा हो सकता हैं| इसकी पत्तियां धनिये की पत्तियों के समान होती हैं| इसके फूल सफ़ेद रंग के होते हैं तथा इसके फूल धनिये के फूल की तरह छतरी के समान होते हैं| जब ये फूल सूख जाते हैं तो इनसे निकलने वाला फल अजवायन कहलाता हैं|

Ajwain Leaves Herbal Arcade
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अजवायन की प्रजातियाँ (Ajwain ki prajati)

  • अजवायन
  • जंगली अजवायन
  • खुरासानी अजवायन
अजवायन के सामान्य नाम Herbal Arcade
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अजवायन के सामान्य नाम (Ajwain common names)

वानस्पतिक नाम (Botanical Name)Trachyspermum ammi
अंग्रेजी (English) Bishop’s weed,  Ajova seeds, Ajowan, Ommum,
हिंदी (Hindi)अजवायन, अजवाइन, अजमायन, जवाइन, अजवां
संस्कृत (Sanskrit)उग्रगंधा, दीप्या, यवानिका, अजमोदिका, यवानी
अन्य (Other)वोम (कन्नड़), अजमो (गुजराती), ओमुम (तमिल), यमानी (बंगाली), अजवाण (मलयालम) ज्वानो (नेपाली)
कुल (Family)Apiaceae

अजवायन के आयुर्वेदिक गुणधर्म (Ajwain ke ayurvedic gun)

दोष (Dosha) कफवातशामक (pacifies cough and vata), पित्तवर्धक (increase pitta)
रस (Taste) कटु (pungent), तिक्त (bitter)
गुण (Qualities) लघु (light), रुक्ष (dry), तीक्ष्ण (strong)
वीर्य (Potency) उष्ण (hot)
विपाक(Post Digestion Effect) कटु (pungent)
अन्य (Others)वेदनास्थापन, शोथहर, अनुलोमन, जंतुघ्न, शीतप्रशमन
Ayurvedic properties of Ajwain Herbal Arcade
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अजवाइन/अजवायन के औषधीय फायदे एवं उपयोग (Ajwain ke fayde or upyog)

प्रसव काल में

  • प्रसव काल में स्त्रियाँ अजवाइन के लड्डू खाती हैं जिससे पाचन तंत्र और गर्भाशय की शुद्धि होती हैं| इसी के साथ ही यह महिलाओं को ताकत देने के लिए भी जाना जाता हैं| इसका चूर्ण बना कर भी इसका सेवन किया जा सकता हैं|

पेट के कीड़ो में (Ajwain for stomach bugs)

  • पेट के कीड़ो को मिटाने के लिए अजवाइन के चूर्ण को छाछ के साथ लेने से कीड़ो का नाश होता हैं|

एसिडिटी में (Ajwain for acidity)

  • गोमूत्र से भावित अजवाइन को जल के साथ लेने से खट्टी डकारें बंद होती हैं|

पेट दर्द में (Ajwain for stomach pain)

  • अजवाइन, सोंठ, सैंधा नमक, हरड इन सब के चूर्ण को उचित मात्रा में गुनगुने जल के साथ लेने से पेट दर्द खत्म होता हैं|

कब्ज़ में (Ajwain for constipation)

  • कब्ज़ को दूर करने के लिए लि गयी अजवाइन की आधी मात्रा में काल मिर्च, सेंधा नमक, काला नमक थोडा सा यवक्षार और उससे भी कम कच्चे पपीते के दूध को पीस लें| अब इसमें नीम्बू का रस डाल कर धूप में रख दें| लगभग एक महीने के बाद जब यह सूख जाये तो इसके चूर्ण का सेवन करने से पाचन से जुडी समस्याएँ दूर होती हैं|

दस्त में (Ajwain for diarrhea)

  • अजवाइन और नमक को जल के साथ लेने से अतिसार में राहत मिलती हैं|

जलोदर में

  • यदि आप जलोदर और आफरे से परेशान हैं तो अजवाइन को पीस कर उसमे थोड़ी हींग मिला कर पेट पर लेप करने से आराम मिलता हैं|

जुखाम में (Ajwain for cold)

  • जुखाम के कारण होने वाले सिर दर्द में अजवाइन के चूर्ण को सूंघने से जुखाम और सिर दर्द दोनों को ही खत्म किया जा सकता हैं|
  • अजवाइन, लौंग और सोंठ का काढ़ा पीने से जुखाम में आराम मिलता हैं|

कान दर्द में (Ajwain for ear)

  • अजवाइन को यदि तिल्ली के तेल में हल्का गर्म करके कान में डाला जाए तो कान में होने वाले दर्द से छुटकारा पाया जा सकता हैं|

खांसी में (Ajwain for cough)

  • अजवाइन के चूर्ण को गर्म गर्म दूध या थोड़े गुनगुने पानी के साथ सुबह, शाम और दोपहर या तीन समय लेने से खांसी में लाभ होता हैं|
  • यदि खांसी कफ के कारण होती हैं तो उचित मात्रा में अजवाइन के साथ घी और शहद मिला कर खाने से कफ की मात्रा कम हो जाती हैं|
  • कफ के कारण होने वाले ज्वर में अजवाइन तथा इसकी तीन चौथाई मात्रा में पिप्पली ले कर इसका क्वाथ बना लें| 1 से 2 चम्मच रोज इसका सेवन करने से इसमें लाभ मिलता हैं|
  • ली गयी मुलेठी की आधी मात्रा में चित्रक मूल मिलाकर तथा इसके बाद इसमें चित्रक मूल के बराबर अजवाइन मिलकर सोते समय लेने से खांसी दूर होती हैं|
  • पुरानी खांसी को समाप्त करने के लिए अजवाइन के अर्क को दिन में तीन बार लेना चाहिए|
  • कई लोगो को भोजन के तुरंत बाद सीने में जलन होती हैं तो ऐसे में अजवाइन और बादाम को पीस कर खाना चाहिए|

मूत्र की अधिकता में (Ajwain for urine related problem)

  • कई बच्चे रात्रि में सोते समय ही मूत्र त्याग कर देते हैं तो ऐसे में उन्हें कुछ मात्रा में अजवायन का सेवन कराना चाहिए|

त्वचा रोगों में (Ajwain for skin disease)

  • घाव होने पर यदि इसका अच्छा और गाढ़ा लेप किया जाता हैं तो घाव जल्दी भरता हैं और संक्रमण से भी छुटकारा मिलता हैं|
  • अजवायन को उबालकर बचे पानी से प्रभावित हिस्सों को धोने से दाद, खाज, खुजली, फुंसी जैसे त्वचा रोगों में लाभ मिलता हैं|

मासिक धर्म के अटकाव में (Ajwain for menstrual problem)

  • यदि किसी भी स्त्री को मासिक धर्म में अटकाव हो तो अजवायन और गुड़ का काढ़ा बना कर सुबह शाम पीने से इस समस्या का नाश होता है|

वीर्य विकार में लाभदायक अजवायन (Ajwain for semen disorder)

  • यदि वीर्य विकार के कारण आप संतान प्राप्ति नही कर पा रहे है तो ऐसे में अजवायन में प्याज का रस और थोड़ी सी शक्कर मिला कर सुबह, दोपहर और शाम को लेना चाहिए| इससे सभी प्रकार के वीर्य विकारों की समाप्ति होती है तथा आपकी संतान प्राप्ति की इच्छा भी बिना रूकावट दूर हो सकती है|

सुजाक रोग में

  • सुजाक के रोगियों को इस औषधि के तेल में शक्कर मिला कर दिन में दो बार लेना चाहिए| इससे सुजाक का शमन होता है|

शराब की लत छुडवाने में मददगार अजवायन

  • शराबी को दिन में दो से तीन बार तक अजवायन चबानी चाहिए| इससे धीरे धीरे नशे की आदत कम होती जाएगी|
  • इस औषधि का काढ़ा बना कर यदि खाना खाने से पहले इसका सेवन करते है तो शराब छोड़ने में काफी हद तक सहायता मिलती है|

बुखार में लाभदायक अजवायन का प्रयोग (Ajwain for fever)

  • सर्दी के कारण आने वाली बुखार में रोगी को दिन में एक से दो बार अजवायन का सेवन करना चाहिए|
  • इसके अलावा बुखार के समय यदि ज्यादा पसीना हो तो इसका चूर्ण बना कर शरीर पर मल सकते है|
  • मलेरिया के कारण आने वाले बुखार में औषधि को रात में गला कर रख दें| सुबह इसमें नमक डाल कर पीने से मलेरिया के कारण आने वाले बुखार में लाभ मिलता है|

सूजन और दर्द में (Ajwain for swelling and pain)

  • विभिन्न कारणों से घायल रोगी को यदि सूजन या दर्द की समस्या हो तो ऐसे में प्रभावित स्थान पर अजवायन को पोटली में बाँध कर सेक करे| इससे कुछ देर के लिए आराम मिलेगा|

बच्चो के काँटा चुभने पर अजवायन

  • काँटा यदि अधिक अन्दर चला गया हो और आसानी से नही निकल रहा हो तो ऐसे में पिघले हुए गुड़ में अजवायन को पीस हल्का गर्म करके बाँध दें| ऐसा करने से काँटा खुद ही बाहर निकल जाता है|

विषाक्त कीट के काट लेने पर अजवायन

  • जहाँ कीट ने काटा हो वहां यदि अजवायन के पत्तों को बांधा जाता है तो विष के उतरने में लाभ मिलता है|

मधुमेह में अजवायन का प्रयोग (Ajwain for diabetes)

  • मधुमेह के रोग में रोगी को अजवायन के पानी का सेवन करना चाहिए| इसका सेवन करने से यह रोग हमारे नियंत्रण में रहता है|

ह्रदय रोगों में (Ajwain for heart disease)

  • अजवायन का सेवन ह्रदय की रोगों से रक्षा करता है तथा उसे बल प्रदान करते है| इसके सेवन करने से रक्तचाप मुख्य रूप से उच्च रक्तचाप पर नियंत्रण में रहता है|

मुंह की बदबू को मिटायें (Ajwain for bad breath)

  • सांसों के साथ जब मुंह से बदबू आने लगती है तो इस औषधि का सेवन किया जा सकता है| यह सांसो में बदबू के साथ ही दांतों और मसूड़ों की समस्या भी हल करता है|

दमा या श्वास में (Ajwain for asthma)

  • अजवायन का सेवन दमा जैसे रोगों को भी रोकने में काफी हद तक सहायता करता है| इसलिए अस्थमा से पीड़ित व्यक्ति को इसका सेवन जरुर करना चाहिए|

अनिद्रा में (Ajwain for insomnia)

  • अनिद्रा से परेशान व्यक्ति को सोने से पहले एक कप अजवायन से बने काढ़े का सेवन करना चाहिए| ऐसा करने से अनिद्रा की परेशानी दूर होने लगती है|

वजन कम करे अजवायन का सेवन (Ajwain for weight loss)

  • वजन कम करने वाले इच्छित व्यक्ति को इसका सेवन करना चाहिए| इससे व्यक्ति का वजन कम होने लगता है तथा व्यक्ति हष्ट पुष्ट भी होता है|

जोड़ो के दर्द में (Ajwain for joint pain)

  • जोड़ो के दर्द से पीड़ित व्यक्ति को इसका सेवन जरुर करना चाहिए| ऐसा करने से जोड़ो में दर्द, सूजन, चुभन, लाल पन दिखाई देना इसके साथ ही आमवात और गठिया रोगों के लक्षण की भी समाप्ति होती है|

उपयोगी अंग (भाग) (important parts of Ajwain)

  • बीज
  • तेल

सेवन मात्रा (dosages of Ajwain)

  • जूस -2 से 7 ml
  • चूर्ण – 500 ml से 2 ग्राम के मध्य
  • क्वाथ – 5 से 10 ml

सावधानियाँ (precautions of Ajwain)

  • सदैव ताज़ी अजवायन का ही प्रयोग करना चाहिए|
  • अजवायन का अधिक सेवन सिर में दर्द कर सकता हैं|

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