abhyarishta
औषधी दर्शन

अभयारिष्ट: फायदें, सेवन, घटक Abhayarishta: benefits, dose,

अभयारिष्ट का परिचय |Introduction of Abhayarishta

अभयारिष्ट एक ऐसी आयुर्वेदिक औषधि है,जिसके असरदार गुण उसकी पहचान है। अभयारिष्ट के उपयोगसे हम उन समस्याओंसे छुटकारा या फिर उनसे हम पीछा छुड़वा सकते जो सामान्यतः होती हैं

जैसे की बवासीर, कब्ज, पाचन में सहायक, लीवर और आंतों से जुड़ी समस्याओं से राहत देता है| और कुछ ऐसी समस्या भी है जिसे हम नजरअंदाज करते रहते है जैसे मलावरोध, उदररोग, मूत्रावरोध इनके इलाज में भी अभयारिष्ट मदगार है।

अगर आप भी इन सभी समस्याओं से किसी समस्या से राहत पानाचाहते हो तो चलो इसकी पूर्ण जानकारी ले लेते हैं: –

जाने अभयारिष्ट में पाई जाने वाली मुख्य घटक के बारे में (जड़ी-बूटियां):- Contents of Abhayarishta

अभयारिष्ट में है कई असरदार जड़ी बूटियों का मेल होता है जो इसकी गुणवत्ता को बढ़ाती है, तो वैसे सभी घटक निम्न दिए गए हैं:-

  • अभया
  • मृदिका
  • विडड़ग
  • मधुक कुसुम
  • जल
  • गुड़
  • गोक्षुर
  • त्रिवृत
  • धान्यक
  • धातकी
  • इंद्रवारुणी
  • चव्य
  • मधुरिका
  • दन्ती
  • मोचरस
अभयारिष्ट: फायदें, सेवन, घटक
अभयारिष्ट: फायदें, सेवन, घटकherbal arcade


4 अभयारिष्ट के उपयोगी फायदे :- Benefits of Abhayarishta

अभयारिष्ट  के कई फायदे हैं जो हमारे दैनिक जीवन की समस्याओं और दिक्कतों से राहत के लिए मरहम का कार्य करती है, चलो देखते हैं अभयारिष्ट की कुछ मुख्य निवारण जो निम्न हैं –

अभयारिष्ट बवासीर के लिये

बवासीर को पाइल्स के नाम से भी जाना जाता है,बवासीर होने के कुछ असाधारण कारण है जो हम पता होने के बावजूद नजरअंदाज कर देते हैं, जो कि नहीं किए जाने चाहिए

  • कब्ज होने पर ध्यान ना देना
  • अधिक तला हुआ और अधिक मिर्च मसाले खाना
  • शौच ढंग / ठीक से ना होना
  • फाइबर युक्त भोजन का सेवन में कमी

और भी कई कारण हो सकते हैं बवासीर के जोकि हम नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन अगर हमें पता है फिर भी जानबूझकर हम ध्यान नहीं देते हैं तो समस्या ज्यादा बढ़ जाती है,बवासीर गंभीर होती नहीं है लेकिन बन जाती है क्योंकि कहीं ना कहीं हमारे लापरवाही उसका कारण बनती है,जिसके कारण जब हम मल मूत्र करते हैं उस समय दिक्कत आ सकती है जलन होना, तेज दर्द होना इत्यादि।

अभयारिष्ट एक ऐसा शोध है जो इसे जड़ से मिटा सकता है, क्योंकि अभयारिष्ट  में उपस्थित उपयोगी घटक फायदेमंद होते हैं, जो समस्या को धीरे धीरे और हमें राहत दिलाने का काम करती है, इससे जलन होना और तेज दर्द होना खत्म होता जाता है, समय पर लेने पर जल्दी असर दिखाती है। अगर आपको बवासीर है या फिर इसके लक्षण आपको मालूम होते हैं तो अभयारिष्ट के इस्तेमाल से आप को लाभ मिल सकता हैं।

कब्ज के लिए

यह एक ऐसी समस्या है,जो हमारे पेट साफ ना होने की वजह से होता है इसके कारण मैं बार-बार शौच के लिए जाना होता है,हमारा पेट साफ ना होना यानि कि खाना खाने में कुछ कमियां या फिर ऐसी कुछ चीजें जिसे हम नजरअंदाज कर देते हैं जो कि निम्न है-

  • समय पर भोजन ना करना
  • देर रात भोजन करना
  • ज्यादा मिर्ची तला खाना
  • तरल पदार्थ कम खाना
  • पानी कम पीना
  • भोजन की ना पचने के बावजूद भी दोबारा भोजन करना
  • दर्द से आराम पाने के लिए अन्य दवाइयों का उपयोग करना जोकि बिना सुझाव के लिए गई है

और भी कई ऐसे कारण हैं जिसे हम ध्यान में नहीं रखते हैं। कब्ज की वजह से सिर दुखना, कुछ करने का मन नहीं होना, गैस बनना इत्यादि लक्षण सामने आते हैं और इन्हीं के कारण हम पूरे दिन परेशान रहते हैं।

अभयारिष्ट के उपयोग से कब्ज को आसानी से दूर किया जा सकता है, इसमें उपयोगी जड़ी बूटियां जो हमारे पेट को राहत पहुंचाती है और पेट को साफ करने में मदद करती है, और अभयारिष्ट के लेने के बाद हमें प्यास समय-समय पर लगती है जिसके कारण पानी की भी कमी दूर होती है जो कब्ज होने के विलक्षणों को दूर करती है। अगर किसी भी व्यक्ति को कब्ज है तो उनके लिए अभी लिस्ट फायदेमंद साबित होता है।

अभयारिष्ट के फायदे| herbal arcade
अभयारिष्ट घटक द्रव्य| herbal arcade

पाचन में

जो भी हम खाना खाते हैं, उसका पाचन, पाचन तंत्र में होता है। अगर कब्ज की समस्या को नजरअंदाज करते रहते हैं तो वह समस्या बढ़कर बवासीर में बदल जाती और उससे भी हम ध्यान में नहीं रखते हैं तो उसमें से गंभीर बन जाती है जिसके कारण हमारे पाचन तंत्र कमजोर होते जाते हैं उस पर सूजन आना, दर्द होना उसके लक्षण है। हमारे पाचन को सही करना और पाचन तंत्र को सुरक्षित रखना यानी कि समय पर भोजन करना और सही पदार्थ को खाना भी एक अच्छा तरीका है जिससे हम अपनी पाचन क्रिया को सक्षम रख सकते हैं। लेकिन अगर किसी को अपने भोजन को पचाने में समस्या आती है 2 निम्न दो मुख्य समस्याओं का सामना कर सकता है

  • मलावरोध
  • मूत्रावरोध

ऐसी स्थिति में अभयारिष्ट के उपयोग से हमें लाभ प्राप्त हो सकता है, क्योंकि यह मल करते समय और मूत्र करते समय जो अवरोध या समस्या होती है उसको कम करने या मिटाने का काम करती है, क्योंकि अभयारिष्ट में उपस्थित औषधियां हमारे पेट के दर्द को, पाचन तंत्र की सूजन को और उपस्थित अवरोध को मिटाती है जिससे हमें आराम पहुंचता है।

लीवर और आंत की समस्या

लिवर और आंत में होने वाली समस्या के कई कारण हो सकते हैं लेकिन उनमें से जो मुख्य कारण हमें देखने को मिलते हैं, मदिरापान करना या अधिक मात्रा में करना, खुले में रखे हुए भोजन का उपयोग लेना (खुले में रखा हुआ भोजन जीवाणु और विषाणु युक्त हो सकता है) इत्यादि हमारे लिवर और आंत को नुकसान पहुंचाते है|

अगर हम इस समस्या से छुटकारा पाना चाहते हैं तो भी अभयारिष्ट  अति उपयोगी साबित हो सकती है क्योंकि इसके उपयोग से लीवर और आंत में उपस्थित विलक्षण समाप्त हो जाते हैं।

इसके उपयोग की जड़ी बूटियां जीवाणु या विषाणु को ठहरने नहीं देती है अर्थात उन्हें मिटा देती है जिससे हम इस समस्या से भी राहत पा सकते हैं।

कब कैसे और कितनी लें अभयारिष्ट की खुराक(Dose):-

अभयारिष्ट को कम से कम दिन में एक या दो बार ले सकते हें, अगर आप दो बार लेते हे तो सुबह और रात को उचित समय पर ले सकते हे या फिर जैसे आपके डॉक्टर सलाह देते है, और मुख्यरूप से इसकी मात्रा 10-25ML ले सकते है, जैसेआपके डॉक्टर सलाह देते है।

अभयारिष्ट  के नुकसान (Side Effectes): –

इससे किसी प्रकार का नुकसान नहीं होता परंतु आयुर्वेद कि किसी भी दवा से नुकसान हो सकता है और उसके निम्न सम्भावित कारण हो सकते है-

  • अनियमित रूप से उपयोग में लेना
  • ज्यादा मात्रा में लेना
  • Expiry Date क्या ध्यान न रखना, वेसे तो किसी आयुर्वेदिक दवाइयों को कम से कम 10 वर्ष तक इस्तेमाल कर सकते लेकिन उसका भी ध्यान होना आवश्यक है।

अभयारिष्ट की उपलब्धता: –

  1. दिव्य अभयारिष्ठ ( divya pharmacy abhyarishta )
  2. बैधनाथ अभयारिष्ठ (Baidyanath abhyarishta )
  3. मुल्तानी अभयारिष्ठ (Multani abhyarishta )
  4. सांडू अभयारिष्ठ (Sandu abhyarishta )
  5. धूतपापेशवर अभयारिष्ठ (dhootpapeshwar abhyarishta )
  6. दीप आयुर्वेदा अभयारिष्ठ (deep ayurveda abhyarishta )
  7. नागार्जुन अभयारिष्ठ (nagarjun abhyarishta )
  8. केरला आयुर्वेदा अभयारिष्ठ (kerala ayurveda abhyarishta )
  9. नवजीवन अभयारिष्ठ (navjeevan abhyarishta )
  10. झंडू अभयारिष्ठ (zandu abhyarishta )
  11. बी. वी. पंडित अभयारिष्ठ (B. V. pundit abhyarishta )
  12. जीवा अभयारिष्ठ ( Jiva abhyarishta )
  13. डाबर अभयारिष्ठ (dabur abhyarishta )
  14. कोट्टाकल अभयारिष्ठ (kottakkal abhyarishta )

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