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ब्राह्मी (जलनीम) Brahmi (Jalneem)

ब्राह्मी (जलनीम) का परिचय: (Introduction of Brahmi)

Table of Contents

ब्राह्मी (जलनीम) क्या है? (Brahmi kya hai?)

दिमाग को मजबूत करने वाली एक औषधि है ब्राह्मी जिसे आयुर्वेद में विशिष्ट दरजा मिला हुआ है| कई औषधीय इस्तेमाल के साथ इसका भी प्रयोग किया जाता है| जैसे ब्राह्मी वटी, मेधा वटी, सारस्वतारिष्ट आदि | यह कोई मामूली सी जड़ी – बूटी नही है| इससे आप अनेक रोगो से छुटकारा पा सकते है|

आयुर्वेद में ऐसी बहुत सारी औषधीयां है जो अनेको रोगो में लाभकारी है| इन सब में यह भी एक विशिष्ट औषधि है जो आपके दिमाग को एक दम स्वस्थ रखती है| दिमाग के अलावा भी इसका प्रयोग कई सारी बीमारियों में उपयोग किया जाता है|

जैसे – तोतलापन, मीरगी, उन्माद, गठिया, शीतपित्त, पाचन संबंधित रोग, बालो के रोग आदि ऐसे रोग है, जिसके प्रयोग में ब्राह्मी औषधि का प्रयोग किया जाता है| आइये आज आपको विस्तार से  इसके फायदों के बारे परिचित करवाते है|

बाह्य स्वरुप (आकृति विज्ञान) (Brahmi ki akriti)

यह वनस्पति समस्त भारत में आर्द्र एवं दलदली भूमि पर लगभग 1100 मीटर की ऊँचाई तक पाई जाती है| बंगाल में इसका अधिक प्रयोग किया जाता है| इसे बंगीय ब्राह्मी भी कहते है| जल के समीप पैदा होने तथा स्वाद में नीम जैसी कड़वी होने की वजह से इसे जलनीम भी कहा जाता है|

इसका पौधा लगभग  लम्बा, भूमि पर फैलने वाला, मांसल तथा शाखा-प्रशाखाओं से युक्त होता है| इसकी पत्तियाँ मांसल तथा चिपचिपे स्राव से युक्त होती हैं तथा हरे रंग के होते है|  इसके फुल सफेद अथवा गहरे नीलाभ रंग  के होते हैं| इसकी फली लम्बी, अण्डाकार, चिकनी तथा नुकीली होती हैं| दो भागो में विभक्त रहती है|  सूखने के बाद भूरे रंग की हो जाती है| इसका फलकाल व फुलकाल पुरे साल तक चलता है|

ब्राह्मी  के सामान्य नाम Herbal Arcade
ब्राह्मी  के सामान्य नाम Herbal Arcade

ब्राह्मी  के सामान्य नाम (Brahmi common names)

वानस्पतिक नाम (Botanical Name)Bacopa monnieri
अंग्रेजी (English)Indian pennywort
हिंदी (Hindi)ब्राह्मी, जलनीम;
संस्कृत (Sanskrit)कपोतवङ्का, सोमवल्ली, सरस्वती, ब्राह्मी, ऐद्री;
अन्य (Other)ब्राम्ही (उड़िया ) ब्रह्मी  (असमिया) नीरब्राह्मी  (कन्नड़) जल ब्राह्मी (गुजराती) नीराब्रह्मी  (तमिल) शम्ब्रनी चेट्टु (तेलगु)  ब्राह्मीशाक (बंगाली) मेधा गिरी  (नेपाली) ब्राह्मी  (मराठी) बार्ना  (मलयालम)
कुल (Family)Scrophulariaceae

ब्राह्मी  के आयुर्वेदिक गुण धर्म (Brahmi ke Ayurvedic gun)

दोष (Dosha) कफवातशामक (pacifies cough and vata)
रस (Taste) तिक्त (bitter)
गुण (Qualities) लघु (light)
वीर्य (Potency) उष्ण (hot)
विपाक(Post Digestion Effect) कटु (pungent)
अन्य (Others)मेध्य, पाचन, अनुलोमन, मूत्रल
Ayurvedic properties of Brahmi Herbal Arcade
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ब्राह्मी (जलनीम) के औषधीय फायदे एवं उपयोग (Brahmi ke fayde or upyog)

बालों की समस्या के ब्राह्मी का प्रयोग (Brahmi for hair)

  • ब्राह्मी का उपयोग बालों संबंधी समस्या में भी काफी फायदेमंद होता है|  आयुर्वेदिक तेलों में ब्राह्मी मुख्य घटक के रूप उपयोग किया जाता है क्योंकि ब्राह्मी बालों की वृद्धि के साथ- साथ उनके झड़ने को भी नियंत्रित करती है और सफेद होने की समस्या, रुसी की समस्या में भी लाभकारी है|

मिर्गी रोग में (Brahmi for epilepsy)

  • जलनीम के पत्तो के रस में वचा, कठु तथा शंखपुष्पी को लेकर इन सब का पेस्ट बना ले और इनको घी में पकाकर सेवन करने से मिर्गी, पागलपन आदि रोगो में लाभ मिलता है|

रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए (Brahmi for immunity)

  • जलनीम का सेवन रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाता है| यदि आप मौसम बदलने के कारण जल्दी ही बीमार पड़ जाते है, और सामान्य सर्दी जुखाम से आप काफी परेशान रहते तो आपको जलनीम का सेवन करना चहिए क्योकि इसमे कुछ ऐसे गुण पाए जाते है जो आपकी रोग प्रतिरोध क्षमता को बढाता है|

कैंसर को रोकने के लिए ब्राह्मी (Brahmi for cancer)

  • कैंसर की समस्या में ब्राह्मी का सेवन इसको फैलने से रोकने में मदद करता है क्योंकि ब्राह्मी में एंटीकैंसर और एंटी टोमोरिगेनिक का गुण पाया जाता है जो की कैंसर को बढ़ने से रोकने में मदद करता है|

मधुमेह में (Brahmi for diabetes)

  • आज कल के खान पान की वहज से लोग मधुमेह के शिकार होते जा रहे है| यदि आप भी इस रोग से ग्रस्त है तो जलनीम का सेवन कीजिये इससे आपको जल्दी से फायदा मिलेगा|

पाचन में (Brahmi for digestion)

  • यदि आपको कुछ खाया पिया नही पचता है तो या आपकी पाचन शक्ति कमजोर है तो जलनीम का सेवन करने से पाचन शक्ति बलवान बनती है और खाया पिया पचने लगता है|
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बुखार में ब्राह्मी (Brahmi for fever)

  • बराबर मात्रा  में जलनीम, बेलमूल, कूठ तथा शंखपुष्पी चूर्ण में मधु मिलाकर सेवन करने से सन्निपात बुखार  के कारण उत्पन्न विकारों का शमन होकर स्वर स्पष्ट होता है| यदि आपको भी इस बुखार की समस्या है तो यह प्रयोग कर सकते है|

सूजन में उपयोगी (Brahmi for swelling)

  • यदि आपको कही पर चोट लग गई हो सूजन आ गई है तो जलनीम के पत्तो को पीसकर हल्का सा गर्म करके सूजन पर लगाने से सूजन मिटती है|

मसूरिका में ब्राह्मी

  • यदि आपके शरीर पर चेचक के दाग आ गये है या फिर मसूरिका के पीड़ित है तो जलनीम के रस में मधु मिलाकर पिने से मसूरिका का शमन होता है|

गठिया में (Brahmi for gout)

  • अगर जोड़ो में होने वाले गठिया के दर्द से परेशान है तो जलनीम के पत्तो को पीसकर लगाने से गठिया के दर्द से आराम मिलता है|

प्रसव के दर्द में ब्राह्मी

  • ब्राह्मी के पत्तो को उबालकर सेवन करने से प्रसव के दौरान होने वाले दर्द में आराम मिलता है|

मूत्र रोग में (Brahmi for urinary problems)

  • यदि आपको पेशाब करते समय दर्द या जलन होती है, या फिर कोई अन्य परेशनी है तो  जलनीम के पत्तो के रस को  पानी के साथ पिने से मूत्र संबंधित समस्या का शमन होता है|

सांस संबंधित समस्या में (Brahmi for breathing problem)

  • यदि आपके सांस नली में सूजन है तो ब्राह्मी के रस का सेवन करने से नली की सूजन से छुटकारा मिलता है|

तोतलापन में ब्राह्मी

  • यदि आपकी जीभ हकलाती है तो जलनीम की पत्तियो को चबाने से तोतलेपन में छुटकारा मिलता है|

खूनी अतिसार में (Brahmi for bloody diarrhea)

  • यदि किसी को भी मौसम बदलने के कारण या किसी अन्य वहज से खूनी दस्त की समस्या है तो जलनीम के रस या जलनीम के चूर्ण का सेवन करने से खूनी दस्त में लाभ मिलता है|

उपयोगी अंग (भाग) (Important parts of Brahmi)

  • जड़
  • पत्ती
  • बीज
  • पंचांग

सेवन मात्रा (Dosages of Brahmi)

  • जूस -5 मिली
  • चूर्ण -2 ग्राम या चिकित्सक के अनुसार

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