GILOY BENEFITS HERBAL ARCADE
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गिलोय: फायदे, उपयोग (Giloy: benefits, usages)

गिलोय का परिचय (Introduction of Giloy)

Table of Contents

गिलोय क्या है? (what is Giloy?)

‘गिलोय’ शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति हो जो इस नाम से परिचित न हो| चाहे शहर हो या गाँव गिलोय सब जगह आसानी से उपलब्ध हो जाती है| हमारे देश में हर कोई व्यक्ति छोटी या बड़ी बीमारी से ग्रसित होता ही है| इसी के चलते सभी लोगो को इसका सेवन शुरू कर देना चाहिए|
गिलोय को आयुर्वेद में अमृता कहा गया है क्योंकि इसका सेवन करने वाले लोगो को यह एक नया जीवन देती है| यह खुद भी नही मरती है और जो इसका सेवन करते हैं उन्हें भी यह मरने नही देती|

गिलोय के इसी गुण के कारण इसे सभी औषधियों में डाला जाता है और उन्हें अधिक प्रभावशाली बनाया जाता है| गिलोय को हम सब रोजाना कहीं न कहीं देख लेते है लेकिन लोग इसमें उपस्थित गुण नही देख पाते और इसका उपयोग करने से वंचित रह जाते है|
प्राचीन काल के कई वैद्यो ने इसका वर्णन भी किया है| आज आपको परिचित कराते है गिलोय के उन गुणों के बारे में जिन्हें जान कर आप इसका सेवन बिना किसी देरी के तुरंत शुरू कर देंगे| इसकी तीन प्रजातियाँ होती है जिन्हें रोगों के उपचार में काम में लिया जाता है|

गिलोय की प्रजातियाँ (Giloy ki prajatiya)

गिलोय

यह अक्सर आम और नीम के पेड़ पौधों पर चढ़ी हुई पाई जाती है| यह पेड़ पर चढ़ने वाली बेल होती है| इसके पत्तें चिकने और पान के पत्तों के आकार के होते है| इसका तना थोडा मोटा होता है| गर्मी के मौसम में इस पर गुच्छो के रूप में फूल आते है| गिलोय के फल भी गुच्छों के अन्दर लगे होते है| इसके फूलों का रंग पीला दिखाई पड़ता है| पकने से पहले इसके फलों का रंग हरा तथा पकाने के बाद लाल हो जाता है|

giloy benefits Herbal Arcade
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खर, गुडूची, अमृता

इसकी लता लम्बी होती है| इसके पत्तों का आकर कुछ अंडाकार होता है| इसके फल भी कच्ची अवस्था में हरे तथा पकने पर लाल हो जाते है| इसका प्रयोग बुखार, खूनी दस्त, चर्मरोग आदि में किया जाता है|

पद्म गिलोय

इसकी लम्बी लता की पतली छाल होती है| फूल हरे और पीले रंग के होते है और पत्तें पान के पत्तों के आकर में होते है| इसके फल कच्चे होने पर हरे और पकाने के बाद पीले और नारंगी रंग धारण कर लेते है| इसका प्रयोग घाव, जोड़ो की समस्या आदि में किया जाता है|

गिलोय के सामान्य नाम (Giloy common names)

वानस्पतिक नाम (Botanical Name)Tinospora cordifolia
अंग्रेजी (English)Tinospora
हिंदी (Hindi)गिलोय, अमृता, गुडूची,
संस्कृत (Sanskrit)वत्सादनी, छिन्नरुहा, गुडूची, तत्रिका, अमृता, मधुपर्णी, अमृतलता, छिन्ना, अमृतवल्ली, भिषक्प्रिया
अन्य (Other)अमृथावल्ली (कन्नड़) गुलवेल (गुजराती) अमृता (तेलुगु) गुर्जो  (नेपाली)
कुल (Family)Menispermaceae
common names of giloy Herbal Arcade
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गिलोय के आयुर्वेदिक गुण धर्म (Giloy ke ayurvedic gun)

दोष (Dosha) त्रिदोषशामक (balance tridosha)
रस (Taste) कषाय (astringent), तिक्त (bitter)
गुण (Qualities) लघु (light), स्निग्ध (oily)
वीर्य (Potency) उष्ण (hot)
विपाक(Post Digestion Effect) मधुर (sweet)
अन्य (Others)कुष्ठघ्न, वेदनास्थापन, दीपन, पाचन
गिलोय के आयुर्वेदिक गुण धर्म Herbal Arcade
गिलोय के आयुर्वेदिक गुण धर्म Herbal Arcade

गिलोय के औषधीय फायदे एवं उपयोग (Giloy ke fayde)

पुराने बुखार को भगाये गिलोय (Giloy for chronic fever)

  • यदि कोई व्यक्ति पुरानी बुखार से पीड़ित हो तो गिलोय को अच्छे से कूटकर पानी के साथ मिट्टी के बर्तन में रख दें| इसे सुबह सुबह छान कर पिला दें| इस जल को सुबह, शाम और दोपहर को पीने से जीर्ण ज्वर या पुरानी बुखार से छुटकारा मिलता है|
  • गिलोय के रस से सिद्ध किये हुए घी का सेवन करने से जीर्ण ज्वर में बहुत अच्छे लाभ मिलते है|
  • ज्वर से पीड़ित व्यक्ति यदि गिलोय के पत्तों की बनी सब्जी खाते है तो ज्वर जल्दी समाप्त होता है|
  • बुखार के समय जलन और गर्माहट को दूर करने के लिए गिलोय के सत् का सेवन करना चाहिए|

प्रकुपित वात के कारण आने वाली बुखार में

  • गिलोय और शतावरी रस दोनों को मिला कर पीड़ित व्यक्ति को देने से वात के कारण आये ज्वर में लाभ मिलता है| वात के कारण आने वाले बुखार के लिए गिलोय एक उत्तम औषधि है|

प्रकुपित पित्त के कारण आने वाले बुखार में

  • गिलोय का काढ़ा बना कर उसमे मिश्री डाल कर सुबह सुबह सेवन करने से प्रकुपित पित्त के कारण आने वाले बुखार में अत्यधिक लाभ मिलता है और जल्द ही व्यक्ति इस समस्या से छुटकारा पा सकता है|

प्रकुपित कफ के कारण आने वाले बुखार में

  • कफ के कारण उत्पन्न ज्वर में गिलोय का काढ़ा बना कर सुबह शाम दिन में दो बार लेना चाहिए इससे कफज ज्वर का जल्द ही शमन हो जाता है|

विषम ज्वर में

  • यदि किसी व्यक्ति को एक दिन छोड़ के दूसरे दिन या दो दिन छोड़ के तीसरे दिन वापस बुखार आने जैसी समस्या हो तो गिलोय के पत्तों से सिद्ध तेल का सेवन करना चाहिए| इससे विषम ज्वर पूरी तरह समाप्त हो जाता है|

मलेरिया में

  • गिलोय के चूर्ण में गुड़, शहद और गाय का घी मिला कर लेने से मलेरिया में फायदा होता है| इसके अलवा इसका सेवन करने से गठिया, नेत्र रोग दूर होने के साथ ही स्मरण शक्ति बढती है|

बवासीर में (Giloy for piles)

  • हरड, गिलोय और धनिया से निर्मित काढ़े में सुबह शाम गुड़ डाल कर सेवन करने से बवासीर या अर्श जैसे रोगों में लाभ पहुँचता है|

प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूती दे (Giloy for strong immune system)

  • प्रायः शरीर में सभी रोग प्रतिरक्षा प्रणाली के कमजोर होने के कारण ही आते है| गिलोय एक ऐसी दिव्य औषधि है जो मनुष्य की प्रतिरक्षा प्रणाली को बहुत अधिक और जल्दी मजबूत करने का काम करती है| इसी कारण यदि किसी व्यक्ति की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर है तो उसे मुख्य रूप से गिलोय का सेवन करना चाहिए|

मधुमेह को खत्म करने में सहायक गिलोय का सेवन (Giloy for diabetes)

  • मधुमेह के रोगियों को रोज एक गिलास ताज़ी गिलोय के रस का सेवन करना चहिये| इससे मधुमेह नियंत्रण में रहता है और शरीर भी स्वस्थ रहता है|

आँख से जुडी समस्याओं में (Giloy for eyes disorder)

  • आँखों की रोशनी बढ़ाने के लिए इससे से निर्मित रस में त्रिफला का बना काढ़ा मिला कर दिन में दो बार मधु के साथ सेवन करना चाहिए|
  • गिलोय का रस बना कर उसमे सैंधा नमक और मधु को अच्छी तरह से मिला कर आँखों में काजल की तरह डालने से आँखों में चमक आती है और नेत्र रोगों का शमन होता है|

कान को साफ़ रखे

  • कान में उपस्थित गन्दगी को बाहर निकालने के लिए इस औषधि को जल में अच्छी तरह से घिस कर उसे हल्का गर्म करके कान में डालना चाहिए| 1 से 2 बूंद डालने पर कान की गन्दगी आसानी से बाहर निकल जाती है|

हिचकी की समस्या में (Giloy for hiccup)

  • हिक्का या हिचकी की समस्या अधिक आने पर गिलोय और सोंठ के चूर्ण को सूंघना चाहिए| इसके अतिरिक्त इन दोनों का क्वाथ बना कर इसमें गाय का दूध मिला कर पिलाने से भी इस समस्या का समाधान किया जा सकता है|

टी.बी. में (Giloy for T.B.)

  • दसों तरह की जड़े (दशमूल), अश्वगंधा, गुडूची, शतावर, बलामूल, अडूसा, पोहकरमूल और अतीस इन सभी को बराबर मात्रा में लेकर काढ़ा बना कर सुबह शाम या दिन में दो बार सेवन करने से इस रोग का शमन होता है|

उल्टियों पर रोक लगाये (Giloy for vomat)

  • अधिक गर्मी या पित्त के प्रकुपित होने के कारण उत्पन्न वमन या उल्टियों को शांत करने के लिए इसके रस में मिश्री मिला कर पीनी चाहिए| इससे जल्द ही व्यक्ति तरोताज़ा महसूस करता है|
  • गिलोय से निर्मित काढ़े में शहद मिला कर पीने से विभिन्न कारणों से उत्पन्न वमन का शमन होता है|

संग्रहणी को समाप्त करे गिलोय का सेवन

गिलोय के फायदे Herbal Arcade
गिलोय के फायदे Herbal Arcade
  • सोंठ, मोथा, अतीस और गिलोय का काढ़ा बना कर दिन में दो बार पीने से इस रोग के साथ साथ शरीर से विषैले पदार्थ भी बाहर निकल जाते है|

पीलिया का शमन करे गिलोय का सेवन (Giloy for jaundice)

  • पीलिया रोग से पीड़ित व्यक्ति के लिए सबसे पहले इस औषधी का काढ़ा बना लें| इस काढ़े में शहद मिला कर रोगी को सुबह, शाम, दोपहर और रात को सेवन करायें| इससे जल्द ही पीलिया की समाप्ति होगी और रोगी भी स्वस्थ होगा|
  • एक गिलास छाछ में गुडूची के पीसे हुए पत्तों को डाल कर सुबह खाली पेट पीना चाहिए| इससे जल्द ही पीलिया या कामला से छुटकारा मिलेगा|
  • यदि कामला अधिक पुराना हो गया हो तो गिलोय के रस द्वारा घी को सिद्ध कर लें| अब इस घी को दूध में मिला कर पीने से पीलिया में लाभ होता है|

खून की कमी को पूरा करे गिलोय (Giloy for anemia)

  • पुनर्नवा, नीम त्वक, पटोलपत्र, सोंठ, कुटकी, अमृता, दारुहल्दी और हरड इन सभी औषधियों का काढ़ा बना कर पीने से खून की कमी तो दूर होती ही है| इसके साथ ही शरीर की सूजन, उदर रोग, पीठदर्द, अस्थमा आदि रोगों में भी लाभ मिलता है|

लीवर समबन्धित रोग में (Giloy for liver disorder)

  • गिलोय, अजमोद, छोटी पीपल और नीम की सींकों को अच्छे से कूटकर पानी के साथ मिट्टी के बर्तन में रख दें| इसे सुबह सुबह छान कर पिला दें| इससे लीवर रोगों के साथ ही पेट से सम्बंधित समस्या जैसे मंद पाचक अग्नि में भी लाभ मिलता है|

प्रमेह रोग में

  • गुडूची से निर्मित रस का सेवन करने से प्रमेह रोग का शमन होता है| इसके अलावा यदि इस रस में मधु डाल कर सेवन किया जाता है तो कुछ ही दिनों में अच्छे परिणाम सामने आते है और प्रमेह का शमन होता है|

मूत्र त्याग करते समय आने वाली समस्या का समाधान करे गिलोय (Giloy for urinary problems)

  • गुडूची के रस में पाषाण भेद और शहद मिलाकर लेने से मूत्र त्याग के समय दर्द होना, जलन होना, मूत्र का बहुत धीरे धीरे निकलना जैसी बहुत सारी समस्याओं का समाधान आसानी से हो पाता है|

गठिया रोग का शमन करने में कारगर गिलोय (Giloy for gout)

  • गठिया में गिलोय का चूर्ण बना कर इसे दूध में मिला कर सुबह, शाम और दोपहर तीन बार पिलाना चाहिए| इसके साथ ही इसका सेवन करने से मूत्र में अधिक अम्लता का समापन होता है|
  • इसके अलावा गिलोय का काढ़ा बना कर पीने से भी गठिया रोग समाप्त होता है|

हाथीपांव की समस्या में (Giloy for fialeria)

  • इस रोग से पीड़ित व्यक्ति को यदि गिलोय के रस में सरसों का तेल मिलाकर सेवन कराया जाता है तो इस समस्या में जल्दी लाभ मिलता है| इसका सेवन प्रातःकाल और सायंकाल खली पेट करना चाहिए|

कुष्ठ में लाभदायक गिलोय का सेवन

  • कुष्ठ रोग से पीड़ित व्यक्ति यदि रोज़ उचित मात्रा में गिलोय के रस का सेवन करता है तो निश्चित ही कुछ महीनों में अच्छे परिणाम दिखना शुरू हो जायेंगे और रोगी को राहत मिलेगी|

शीतपित्त में

  • शीतपित्त की अवस्था में गिलोय के रस में बावची को पीस कर लेप करने से आराम मिलता है|

कब्ज़ दूर करे गिलोय का सेवन (Giloy for constipation)

  • अनुचित खान पान के कारण आज कल लगभग सभी व्यक्तियों को कब्ज़ की शिकायत बनी रहती है| इस शिकायत को दूर करने के लिए अमृता के रस के साथ गुड़ का सेवन करना चाहिए| इससे जल्द ही कब्ज़ से छुटकारा मिलता है|

ह्रदय रोगों में फायदेमंद गिलोय का सेवन (Giloy for heart disease)

  • ह्रदय रोगों से पीड़ित रोगियों को अपने रोग को जल्द से जल्द समाप्त करने के लिए गिलोय का सेवन काली मिर्च और सुखोष्ण जल के साथ करना चाहिए|

रक्त केंसर में (Giloy for Blood cencar)

  • गेंहू के जवारे के साथ यदि गिलोय का रस मिला कर रक्त केंसर के रोगियों को दिया जाता है तो इससे रोगियों को काफी फायदा मिलता है और जल्दी स्वस्थ होने में मदद भी मिलती है|

अस्थमा में (Giloy for asthma)

  • अमृता का सेवन अस्थमा के रोगियों के लिए भी बहुत जरुरी होता है| इसके सेवन से प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है और अस्थमा की समस्या में भी लाभ मिलता है|

उपयोगी अंग (भाग) (Important parts of Giloy)

  • कांड

सेवन मात्रा (Dosage of Giloy)

  • जूस -15-30ml
  • चूर्ण -3-6 gram
  • क्वाथ – 50-100ml

गिलोय से निर्मित औषधियां

  • अमृतारिष्ट
  • गुडूच्यादि चूर्ण
  • गुडूच्यादि क्वाथ
  • गुडूची लौह
  • गुडूची तेल
  • गिलोय घनवटी

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