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औषधी दर्शन

शिरःशूलादिवज्र रस: हर तरह का सिर दर्द होगा अब गायब सिर्फ एक दवा से

शिरःशूलादिवज्र रस का परिचय (Shirashuladivajra ras ka introduction: Benefits)

शिरःशूलादिवज्र रस क्या हैं? (Shirashuladivajra ras kya hai?)

शिर का अर्थ होता हैं सिर और शूल का अर्थ होता हैं दर्द | यह एक आयुर्वेदिक औषधि हैं जो किसी भी प्रकार के सिर दर्द को खत्म करने में सहायता करती हैं | यह औषधि मुख्य रूप से सिर दर्द को समाप्त करती हैं और मस्तिष्क को प्रबल बनाती हैं | आयुर्वेद में 11 प्रकार के सिर दर्द (वात, पित्त, कफ, सन्निपात, रक्त का प्रकोप, क्षय, कृमि, सूर्यावर्त, अनन्तवात, अर्धावभेदक, शंखक) बताये गए हैं उन सभी में शिरःशूलादिवज्र रस का उपयोग किया जाता हैं और सफलता भी प्राप्त होती हैं |

शिरःशूलादिवज्र रस के घटक द्रव्य (Shirashuladivajra ras ke ghatak dravya)

  • शुद्ध पारा
  • शुद्ध गंधक
  • लौह भस्म
  • ताम्र भस्म
  • शुद्ध गुग्गुल
  • त्रिफला चूर्ण
  • कूठ
  • मुलेठी
  • गोखरू
  • वायविडंग
  • दशमूल क्वाथ
  • घी
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शिरःशूलादिवज्र रस बनाने की विधि (Shirashuladivajra ras banane ki vidhi )

इस औषधि को बनाने के लिए सबसे पहले पारा और गंधक की कज्जली बना लें | बाकी बची सारी औषधियों का चूर्ण बना कर दशमूल क्वाथ में घोंटे और घी लगे हाथ से गोलियां बना कर सुखा लें |

शिरःशूलादिवज्र रस के फायदे( Shirashuladivajra ras ke fayde)

सिर दर्द में( for head ache)

पूरे शरीर का केंद्र स्थान सिर होता हैं | यदि शरीर के किसी भी अंग में किसी भी तरह की तकलीफ आये तो उससे मस्तिष्क पर प्रभाव पड़ता हैं और सिर दर्द होने लगता हैं | जब तक अंग की तकलीफ नही मिट जाती तब तक सिर भी जारी रहता हैं |
यह औषधि सिर्फ सिर दर्द ही नही मिटाती बल्कि उसके कारणों को भी समाप्त करने में सहायता करती हैं |

इसका उपयोग निम्न प्रकार के सिर दर्द में किया जाता हैं-

वात से जुड़े सिर दर्द में

  1. आयुर्वेद के अनुसार शरीर में किसी भी प्रकार का दर्द वात प्रकुपित होने के कारण होता हैं | जब वात प्रकुपित होने पर सिर दर्द हो तो इस औषधि का सेवन करना चाहिए |
  2. पित्त से जुड़े सिर दर्द में
    मनुष्य के शरीर में पित्त पाचन से जुडी क्रिया में अपनी अहम् भूमिका निभाता हैं | यदि पित्त का संतुलन बिगड़ जाये तो इसके कारण होने वाले सिर दर्द में इस रस का उपयोग करना चाहिए |
  3. कफ से जुड़े सिर दर्द में
    कफ की मात्रा शरीर में अधिक हो जाने पर यह छाती में, सांस नली में आदि जगह जम जाता हैं जिसके कारण जुखाम, खांसी की समस्या आती हैं| इनके साथ ही सिर दर्द भी एक आम समस्या हैं जो कफ के कारण होती हैं | इस समस्या में इसका का प्रयोग करना चाहिये |
  4. रक्त के प्रकोप से
    यह औषधि रक्त के प्रकुपित कारण होने के कारण होने वाले दर्द को समाप्त करती हैं |
  5. क्षय के कारण से
    व्यक्ति को किसी प्रकार की चोट, या दुर्घटना के बाद होने वाले सिर दर्द में इस औषधि का प्रयोग करना चाहिए |
  6. कृमि के कारण होने वाले सिर दर्द में
    कई बार व्यक्ति के पेट और आंतो में कृमि होते हैं और इसका पता उसे नही होता हैं | चूँकि व्यक्ति का भोजन कृमि खाते रहते हैं तो इसके कारण कमजोरी, पोषक तत्वों की कमी हो जाती हैं | इसके कारण होने वाले सिर दर्द में भी यह औषधि काफी उपयोगी होती हैं |
  7. सूर्यावर्त सिर दर में
    सूर्योदय से दोपहर तक बढ़ने वाला सिर दर्द या उसके बाद भी जारी रहने वाले सिर दर्द में इस औषधि का उपयोग करना चाहिए | यह दर्द को जड़ से समाप्त करने की क्षमता रखती हैं |
  8. सन्निपात से जुड़े सिर दर्द में
    सन्निपात की समस्या में सिर दर्द एक आम बात हैं | इस समस्या में होने वाले सिर दर्द में यह औषधि एक उत्तम औषधि हैं |
  9. अनन्तवात
  10. अर्धावभेदक और
  11. शंखक
    जैसे सभी प्रकार के सिर दर्द में शिरःशूलादिवज्र रस का सेवन करना चाहिए |
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शिरःशूलादिवज्र रस के सेवन का प्रकार और मात्रा (Shirashuladivajra ras ki sevan vidhi)

• 1 से 2 गोली का सेवन सुबह शाम करना चाहिए |
• इस औषधि का सेवन बकरी के दूध, गोदन्ती भस्म और मिश्री मिलाकर जल के साथ करें |

शिरःशूलादिवज्र रस का सेवन करते समय रखी जाने वाली सावधानियाँ( Shirashuladivajra ras ki savdhaniya)

  • इसका सेवन करने से पहले किसी अच्छे चिकित्सक की सलाह जरुर लेनी चाहिए |
  • गर्भवती महिला को इस औषधि का सेवन नही करना चाहिए |
  • जीर्ण रोगी अपने रोग के बारे में चिकित्सक को बता कर ही इसका सेवन करें |
  • अधिक मात्रा में इसका उपयोग न करें
  • बच्चो की पहुँच से इसे दूर रखे |

शिरःशूलादिवज्र रस की उपलब्धता (Shirashuladivajra ras ki uplabdhta)

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